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Gita : Jeevan Jeene Ka Supath   

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Author Dharmaveer Gupta
Features
  • ISBN : 9788168342132
  • Language : Hindi
  • Publisher : Prabhat Prakashan
  • Edition : 1st
  • ...more

More Information

  • Dharmaveer Gupta
  • 9788168342132
  • Hindi
  • Prabhat Prakashan
  • 1st
  • 2026
  • 136
  • Soft Cover
  • 150 Grams

Description

"गीता' इतना महत्त्वपूर्ण ग्रंथ है कि कोर्ट-कचहरी में हिंदू धर्म के अनुयायी इसी पर हाथ रखकर अपनी सत्यता प्रकट करते हैं। भारत में ही नहीं, बल्कि विश्व भर में अति विशिष्ट अधिकारी और नेतागण भी गीता पर हाथ रखकर अपनी सत्यता प्रकट करते हैं, जैसे यू.के. के एक पूर्व प्रधानमंत्री श्री ऋषि सुनक या अमरिका की पूर्व राष्ट्रपति श्रीमती कमला हैरिस ने गीता पर हाथ रखकर अपनी सत्यता की शपथ ली।

श्रीकृष्ण कहते हैं कि प्रत्येक मनुष्य को परमात्मा-प्राप्ति का जन्मसिद्ध अधिकार है। साधक होने के नाते अपने साध्य को पाने में वह पूर्णतः स्वतंत्र, समर्थ और अधिकारी है। श्रीकृष्ण ने निष्काम कर्मयोग और नियत कर्म करने पर बल दिया है। काम, क्रोध, लोभ और मोह का त्याग करना और किसी दूसरे के लिए अहितकारी कर्म करना अशुभ माना गया है।

पुरानी सभ्यताओं में रोमन और यूनानी सभ्यताएँ भी हैं। यद्यपि गीता में वर्णित विषयों से भिन्नताएँ भी हैं, परंतु फिर भी वे मानते हैं कि आत्मा शाश्वत और अवध्य है। वे सभ्यताएँ भी सत्य के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करती हैं, जैसा कि गीता में वर्णित है। वास्तव में 'गीता' जीवन का सुपथ दिखाती है। गीता-ज्ञान जितना पठनीय है, उतना ही आचरणीय भी है।"

The Author

Dharmaveer Gupta

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