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Bhakti Sahitya Aur Sant-Parampara   

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Author Acharya Ramji Tiwari
Features
  • ISBN : 9789375730330
  • Language : Hindi
  • Publisher : Prabhat Prakashan
  • Edition : 1st
  • ...more

More Information

  • Acharya Ramji Tiwari
  • 9789375730330
  • Hindi
  • Prabhat Prakashan
  • 1st
  • 2026
  • 320
  • Soft Cover
  • 350 Grams

Description

"भक्तिभावना का उद्भव वैदिक सूक्तों भसे ही आरंभ हो गया था। दक्षिण के आलवार ग्रंथों में इसका एकरूप स्पष्ट होकर सामने आया। रामानुजाचार्य, माधवाचार्य जैसे आचार्यों ने भक्तिभावना को सैद्धांतिक आधार प्रदान किया। सन् 1206 से 1526 तक गुलाम, तुगलक, सैयद और लोदीवंश के शासकों की धार्मिक कट्टरता के कारण भारत की समृद्ध संस्कृति और भक्तिभावना आहत होने लगी। बाबर के आक्रमण ने एक नई चुनौती खड़ी कर दी।

परतंत्र होकर पीड़ित और न्याय-धर्म से वंचित धर्मप्राण भारत में असंतोष की लहर फैल गई। इसी समय सिद्धयोगी और शीर्ष कोटि के विद्वान् स्वामी रामानंद ने राम को ब्रह्म, लक्ष्मण को जीव और सीता को प्रकृति मानकर रामानंदी संप्रदाय की स्थापना की और तैलधारा की भाँति अविच्छिन्न राम-भक्ति का उपदेश दिया। दाक्षिणात्य आचार्य वल्लभ ने शुद्धाद्वैत सिद्धांत और पुष्टिमार्गी साधना पद्धति द्वारा पूर्ण ब्रह्म श्रीकृष्ण की उपासना का प्रचार करके इसलामी सत्ता के विरुद्ध राष्ट्रीय अस्मिता को उद्धत किया।

उन्होंने भी भेदरहित समतामूलक समाज-रचना पर बल दिया। ईश्वर विश्वासी, सत्यान्वेषी और प्रेम-साधक सूफी संतों ने भी भक्ति-साहित्य के विकास में महत्त्वपूर्ण योगदान किया। इन्हीं के सम्मिलित प्रभाव से मध्यकालीन भारत समग्र रूप से भक्तिरस से सिक्त हो गया।

भक्ति काव्य के रचयिता सर्वभूतहितरत, आस्तिक, आस्थासंयुक्त सदाचारी संत रहे हैं। हमारे यहाँ संतों और भक्तों की सुदीर्घ परंपरा है। यह ग्रंथ शोधार्थियों, विद्यार्थियों और जिज्ञासु पाठकों के लिए उपयोगी सिद्ध होगा, ऐसा विश्वास है।"

The Author

Acharya Ramji Tiwari

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