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Beti Tu Durga Ban Jana Poems Book   

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Release Date 15-01-2026
Author Urvashi Agrawal ‘Urvi’
Features
  • ISBN : 9789355621955
  • Language : Hindi
  • Publisher : Prabhat Prakashan
  • Edition : 1st
  • ...more

More Information

  • Urvashi Agrawal ‘Urvi’
  • 9789355621955
  • Hindi
  • Prabhat Prakashan
  • 1st
  • 2025
  • 376
  • Soft Cover
  • 450 Grams

Description

यह पुस्तक बेटियों की शक्ति, साहस, संघर्ष और संभावनाओं का उत्सव है।

यह केवल उनकी उपलब्धियों या वीरता की कहानी नहीं, बल्कि उनके दर्द, आशा और समाज से उनकी अपील को भी सामने लाती है।

हर अध्याय में बेटियों के विभिन्न पहलुओं गृहस्थ जीवन, शिक्षा, खेल, कला, नेतृत्व, सिनेमा और समाज में योगदान को उजागर किया गया है।

यह पुस्तक माता-पिता, समाज और हर पाठक के लिए एक संदेश है कि बेटियाँ केवल घर की शोभा नहीं, बल्कि शक्ति, प्रतिभा और भविष्य की नींव हैं।

बेटी ही मेरा सम्मान, बेटी पर हरदम कुर्बान

बेटी सबका गर्व गुमान, बेटी ही मेरा अभिमान

चाकू दो धारी बन जाना, बेटी वो आरी बन जाना

अपनी रक्षा आप करे जो, वैसी तू नारी बन जाना

दुनिया भर में घूमो बेटी, नाचो गाओ झूमो बेटी

पाँव धरातल पर ही रखना, बेशक नभ को चूमो बेटी

The Author

Urvashi Agrawal ‘Urvi’

डॉ. उर्वशी अग्रवाल 'उर्वी'—शब्द ही ब्रह्मांड है और ब्रह्मांड ही शब्द है। यदि ब्रह्मांड न होता तो शब्द न होता और यदि शब्द न होता तो संभवतः यह ब्रह्मांड भी न होता। आदिकाल से ही शब्द का एक विशेष महत्त्व है और मैंने एक कवि रूप में शब्दों के इसी महत्त्व को समझा और पाया कि सही शब्दों के चयन से और व भी पद्य रूप में अधिक प्रभाव डालता है और बस यहीं से मेरी काव्ययात्रा प्रारंभ हुई, जो निरंतर अविरल चल रही है।

गत कुछ वर्षों में सृष्टि के आशीर्वाद से कविता के साथ-साथ गीत-गजल, दोहा-चौपाई की विधा पर लिखना शुरू किया। महिला विषयों, विशेषकर उनकी विभिन्न भावनाओं को कविताओं, गजलों, दोहों और चौपाइयों के माध्यम से प्रस्तुत करती आ रही हूँ। हिंदी के अतिरिक्त सरैकी भाषा में भी काव्य सृजन। आकाशवाणी द्वारा आयोजित हिंदी व सरैकी के कई काव्य प्रसारणों व कविता पाठ में सम्मिलित हुई हूँ। अनेक टी.वी. चैनलों के कार्यक्रमों में कविताएँ व गजलें प्रस्तुत की हैं। अब तक लगभग एक हजार से अधिक हिंदी कविताओं व पच्चीस सौ से अधिक दोहों का सृजन ।

लड़कियों व महिलाओं को सुरक्षा के प्रति जागरूक करने के लिए अपनी 'हर नारी की अंतर्वेदना मे तो' कविता के माध्यम से विभिन्न विद्यालयों, कॉलेजों आदि में कार्यशालाओं में प्रस्तुति की है, जो काफी चर्चित रही है और जिनकी लगातार माँग रहती है।

प्रकाशित कृतियाँ : व्यथा कहे पांचाली, मैं शबरी हूँ राम की, अंतर्मन की पाती : सुनो ना ! हँसली चाँद की, यादों की कंदील, सारा कमाल उसका है, खुशबू तेरे खयाल की।

आगामी पुस्तकें : हर नारी की अंतर्वेदना : मी टू, बेटी तू दुर्गा बन जाना, मैंने कहा''' उसने कहा''', पाँच गजल-संग्रह।

संप्रति : वर्तमान में सुविख्यात हिंदी साहित्यिक पत्रिका 'साहित्य अमृत' की उप-संपादिका हैं।

अध्यक्षा: Defence and Security Alert (DSA) Magazine

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