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Yoddha Sannyasi : Vivekanand

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Author Vasant Potdar
Features
  • ISBN : 9789350481486
  • Language : Hindi
  • Publisher : Prabhat Prakashan
  • Edition : 1st
  • ...more

More Information about International Finance: Theory and Policy, 10th ed.

  • Vasant Potdar
  • 9789350481486
  • Hindi
  • Prabhat Prakashan
  • 1st
  • 2012
  • 272
  • Hard Cover
  • 565 Grams

Description

''उठिए, जागिए, मेरे देशबंधुओ! आइए, मेरे पास आइए। सुनिए, आपको एक ज्वलंत संदेश देना है। इसका अर्थ यह नहीं है कि मैं कोई अवतार हूँ। ना-ना, मैं अवतार तो नहीं ही हूँ। कोई दार्शनिक अथवा संत भी नहीं हूँ। मैं हूँ, एक अति निर्धन व्यक्‍ति, इसीलिए सारे सर्वहारा मेरे दोस्त हैं। मित्रो! मैं जो कुछ कह रहा हूँ, उसे ठीक से समझ लीजिए। समझिए, आत्मसात् कीजिए और उसे जनमानस तक पहुँचाइए। घर-घर पहुँचाइए मेरे विचार। मेरे विचार-वृक्ष के बीजों को दुनिया भर में बोइए। तर्क की खुरदुरी झाड़ू से अंधविश्‍वास के जालों को साफ करने का अर्थ है शिक्षा। संस्कृति और परंपरा, दोनों एकदम भिन्न हैं, इसे स्पष्‍ट करने का नाम है शिक्षा।’ ’
स्वामी विवेकानंद के बहुआयामी व्यक्‍तित्व और कृतित्व के विषय में उपर्युक्‍त कथन के बाद यहाँ कुछ अधिक कहने की आवश्यकता नहीं है। हमारे आज के जो सरोकार हैं, जैसे शिक्षा की समस्या, भारतीय संस्कृति का सही रूप, व्यापक समाज-सुधार, महिलाओं का उत्थान, दलित और पिछड़ों की उन्नति, विकास के लिए विज्ञान की आवश्यकता, सार्वजनिक जीवन में नैतिक मूल्यों की आवश्यकता, युवकों के दायित्व, आत्मनिर्भरता, भारत का भविष्य आदि-आदि। भारत को अपने पूर्व गौरव को पुन: प्राप्‍त करने के लिए, समस्याओं के निदान के लिए स्वामीजी के विचारों का अवगाहन करना होगा।
मूल स्रोतों और शोध पर आधारित यह पुस्तक 'योद्धा संन्यासी’ हर आम और खास पाठक के लिए पठनीय एवं संग्रहणीय है।

The Author

Vasant Potdar

जन्म : 6 सितंबर, 1937, जबलपुर।
शिक्षा : होलकर कॉलेज, इंदौर।
1961 में संगीतकार सी. रामचंद्रजी के निजी सहायक के रूप में मुंबई पहुँचे।
कृतित्व : 1964 में प्रख्यात मराठी व्यंग्य लेखक पु.ल. देशपांडे के मार्गदर्शन में ‘वंदे मातरम्’ की क्रांतिगाथा पर एकल नाट्य प्रयोग का आविष्कार किया। फिर ‘सेर शिवराज’ (शिवाजी), ‘योद्धा संन्यासी’ (विवेकानंद) जैसे विख्यात पात्रों पर एकल नाट्य प्रयोग करने हेतु पूरे भारत में तथा विदेश में भ्रमण किया।
मराठी, हिंदी एवं बांग्ला भाषी प्रसिद्ध समाचार-पत्रों में विपुल लेखन।

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