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Viveki Rai ki lokpriya kahaniyan   

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Author Viveki Rai
Features
  • ISBN : 9789351869078
  • Language : Hindi
  • ...more

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  • Viveki Rai
  • 9789351869078
  • Hindi
  • Prabhat Prakashan
  • 2016
  • 184
  • Hard Cover

Description

कथाकार विवेकी राय की लोकप्रिय कहानियों का यह संकलन एक बहुत बड़ी आवश्यकता की पूर्ति है। लगातार छह दशक तक कहानी-साहित्य की समस्त पीढि़यों और आंदोलनों को आत्मसात् करते हुए उक्त क्षेत्र में कलम चलाकर, ग्राम-जीवन के यथार्थ को, उसके सुख-दुःख को प्रामाणिक रूप में प्रस्तुत करके उन्होंने एक कीर्तिमान स्थापित किया है। उनकी कहानियाँ अपने बृहत्तर रचनात्मक सरोकारों के साथ संपूर्ण भारत के स्वातंत्र्योत्तर गाँवों का साक्षात् कराती हैं। टुच्ची राजनीति और विकास के खोखले दावों से दो-दो हाथ करते दिखते हैं डॉ. राय। प्रेमचंद और फणीश्वरनाथ रेणु के बाद गाँव की संवेदनशील पृष्ठभूमि पर लिखनेवाली पीढ़ी के सबसे सशक्त कथाकारों की श्रेणी में शिखरस्थ हैं। ग्राम्यांचल, कृषि, संस्कृति और अध्यापक-जीवन आदि के विभिन्न अनुभवों की झाँकियों से संपृक्त इन कहानियों में उन्होंने अपने अंदर के प्रौढ़ भाषाविद्, शैलीकार और कुशल कथा-लेखक को जमकर खटाया है। यही कारण है कि कथाकार राय की कहानियाँ नए संदर्भों के साथ अपनी अर्थवत्ता को ग्रहण कर सकी हैं। इस संकलन से हिंदी कथा-साहित्य का पाठक उनके समृद्ध कहानीकार रूप से परिचित हो सकेगा, ऐसा विश्वास है।

The Author

Viveki Rai

जन्म : 19 नवंबर, 1924, गाँव-भरौली, जिला-बलिया (उ.प्र.)।

काव्य : अर्गला, रजनी गंधा, यह जो है गायत्री ।
कहानी संग्रह : जीवन परिधि, गूँगा जहाज, नई कोयल, कालातीत, बेटे की बिक्री, चित्रकूट के घाट पर, विवेकी राय की श्रेष्‍ठ कहानियाँ ।
उपन्यास : बबूल, पुरुष पुराण, लोकऋण, श्‍वेतपत्र, सोनामाटी, समर शेष है, मंगल भवन, नमामि ग्रामम् अमंगलहारी ।
ललित निबंध : फिर बैतलवा डाल पर, जलूस रुका है, गँवई गंध गुलाब, मनबोध मास्टर की डायरी, नया गाँवनामा, मेरी श्रेष्‍ठ व्यंग्य रचनाएँ, आम रास्ता नहीं है, जगत् तपोवन सो कियो ।
निबंध और शोध समीक्षा : त्रिधारा, गाँवों की दुनिया, किसानों का देश, अध्ययन आलोक, स्वातंत्र्योत्तर कथा -साहित्य और ग्राम-जीवन, हिंदी।

उपन्यास : उत्तरशती की उपलब्धियाँ, हिंदी कहानी : समीक्षा और संदर्भ, समकालीन हिंदी उपन्यास, हिंदी उपन्यास : विविध आयाम, आस्था और चिंतन।
भोजपुरी साहित्य : के कहल चुनरी रँगाल (ललित निबंध), जनता के पोखरा (काव्य), भोजपुरी कथा- साहित्य के विकास (समीक्षा), ओझइती (कहानी संग्रह), गंगा-जमुना-सरस्वती (विविध विधा), अड़बड़ भइया की भोजपुरी चिट्ठी (फीचर) ।

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