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"हम हिंदुओं ने 712 ई. से लेकर 1857 ई. तक सतत संघर्ष करके अपने धर्म व संस्कृति को बहुत मुश्किल से सर्वाइव करवाया था। उसके बाद हमें जो स्वतंत्रता मिली, हमें लगा कि हमारे दुर्दिन अब समाप्त हो गए। लेकिन स्वतंत्रता के तुरंत बाद से ही धर्मनिरपेक्षता और सेक्युलरवाद की ओट में हमारे विरुद्ध पुनः षड्यंत्र होने लगे। यह पुस्तक उन षड्यंत्रों से आज के युवाओं को परिचित करवाती है।
आधुनिक सूचना-क्रांति और सोशल मीडिया के विकास के साथ हिंदुत्व की लहर हमारी रगों में दौड़ने लगती है और हम अपने विरुद्ध हो रहे षड्यंत्रों के विरुद्ध मुखर हो जाते हैं। इस हिंदुत्व की लहर पर सवार हिंदूवादी सरकारें केंद्र तथा राज्य की सत्ता में आने लगती हैं और वे जनमानस की भावनाओं के अनुरूप हिंदुओं के हितों को संरक्षण देने वाले कदम उठाने लगती हैं। इन सबके परिणामस्वरूप देश का अधिकांश भाग भगवामय हो जाता है।
ऐसे में आवश्यक है कि हिंदू का एक-एक बच्चा 'हिंदू', 'हिंदुत्व' व 'हिंदू राष्ट्र' की अवधारणा को अच्छे से समझकर आत्मसात् करे। हमारे बच्चे इन सबसे अनभिज्ञ रहे हैं, इसी कारण वे धर्मनिरपेक्षता और सेक्युलरवाद की चपेट में आते रहे हैं। इस पुस्तक को पढ़ने के बाद वे अच्छे से समझ जाएँगे कि न सिर्फ हमें अपने अस्तित्व के सर्वाइवल के लिए, बल्कि विश्व में शांति स्थापित करने के लिए भारत को 'हिंदू राष्ट्र' बनाना ही पड़ेगा।"