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Nagrikta Sanshodhan Adhiniyam ke Virodh Ki RAjneeti (PB)   

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Author Dr. Kuldip Chand Agnihotri
Features
  • ISBN : 9789389982145
  • Language : Hindi
  • Publisher : Prabhat Prakashan
  • Edition : 1
  • ...more
  • Kindle Store

More Information

  • Dr. Kuldip Chand Agnihotri
  • 9789389982145
  • Hindi
  • Prabhat Prakashan
  • 1
  • 2020
  • 80
  • Soft Cover

Description

भारत के नागरिकता अधिनियम में हुए संशोधन (नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019) को लेकर देश भर में बहस शुरू हो गई। इस संशोधन के द्वारा पाकिस्तान, अफगानिस्तान व बँगलादेश से भारत में आ चुके अल्पसंख्यक समुदाय के नागरिकों को भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान है। विरोध करनेवाले दो समूह हैं। पहला ऐसा समूह, जो विरोध में अपना राजनीतिक स्वार्थ देखता है। दूसरा ऐसा समूह, जो जानबूझकर या फिर अनजाने में संशोधन को लेकर भ्रम का शिकार हो गया है। वह इस संशोधन को नागरिकों के राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर के साथ नत्थी करके देखता है, जबकि दोनों का आपस में कुछ लेना-देना नहीं है। आज सत्तर साल बाद नरेंद्र मोदी ने इस शरणार्थी हिंदू समाज, अफगानी हिंदू-सिख समाज और भारतीय नागरिकता के बीच नेहरू और उनकी पार्टी द्वारा खड़ी की गई दीवार को तोड़ दिया है। यह कांग्रेस द्वारा किए गए भारत विभाजन से उपजे पाप के एक दाग को धोने का ऐतिहासिक फैसला है, लेकिन इसे क्या कहा जाए, कि आज कांग्रेस और मुसलिम लीग मिलकर एक बार फिर पाप की उस दीवार को बचाने का प्रयास कर रही हैं। प्रस्तुत पुस्तक में इस समस्या का भारत विभाजन के परिप्रेक्ष्य में अध्ययन प्रस्तुत किया गया है।

The Author

Dr. Kuldip Chand Agnihotri

डॉ. कुलदीप चंद अग्निहोत्री (1951) लंबे अरसे से अध्ययन-अध्यापन से जुड़े हैं। सिख नेशनल कॉलेज बंगा से बी.एससी. करने के बाद लायलपुर खालसा कॉलेज जालंधर से एम.ए. और पंजाब विश्वविद्यालय चंडीगढ़ से पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। पंजाब विश्वविद्यालय से ही आदि ग्रंथ आचार्य की परीक्षा उत्तीर्ण की। पंजाबी विश्वविद्यालय पटियाला से पंजाबी भाषा में ऑनर्ज की डिग्री प्राप्त की। कुछ देर गुरु नानक खालसा कॉलेज-सुलतानपुर लोधी में भी पढ़ाते रहे। हिमाचल प्रदेश में अनेक उच्च अकादमिक पदों पर रहे—बाबासाहेब आंबेडकर पीठ के अध्यक्ष रहे। कुछ समय तक पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड के उपाध्यक्ष का दायित्व भी सँभाला। भारत तिब्बत सहयोग मंच के संरक्षक अग्निहोत्री ने सन् 1975 में भारत सरकार द्वारा घोषित की गई आपातस्थिति का विरोध करते हुए जेल यात्रा भी की। अग्निहोत्रीजी की दो पुस्तकें, मध्यकालीन भारतीय दशगुरु परंपरा-इतिहास का स्वर्णिम पृष्ठ तथा गुरु गोबिंद सिंह व्यक्तित्व और कृतित्व काफी चर्चित हैं। हिमाचल प्रदेश के बडसर नगर में दीनदयाल उपाध्याय महाविद्यालय की स्थापना की। भारतीय भाषाओं की एकमात्र संवाद समिति ‘हिंदुस्थान समाचार के निदेशक मंडल के सदस्य रहे।’ ‘जनसत्ता’ अखबार से भी जुड़े रहे। हिमाचल प्रदेश विधानसभा की पुस्तकालय समिति के विशेष आमंत्रित सदस्य रहे। संप्रति हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय धर्मशाला के कुलपति है।

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