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Author Rajeev ‘Acharya’
Features
  • ISBN : 9788168342774
  • Language : HIndi
  • Publisher : Prabhat Prakashan
  • Edition : 1st
  • ...more

More Information

  • Rajeev ‘Acharya’
  • 9788168342774
  • HIndi
  • Prabhat Prakashan
  • 1st
  • 2026
  • 320
  • Soft Cover
  • 350 Grams

Description

"जानकी ! मैं चीखा और हड़बड़ाकर उठ बैठा।

मैं द्वापर में था, कुरुक्षेत्र की युद्धभूमि में। सूर्योदय हो चुका था। सभी योद्धा सूर्यदेव को प्रणाम कर रहे थे। मैंने चौंककर अपने चारों तरफ देखा। अर्जुन मुझसे थोड़ी दूर पूर्व की ओर हाथ जोड़े खड़ा था।

आखिर यह सब क्या था ? मुझे जानकी के हरण का स्वप्न क्यों आया ? क्या अर्थ है इस स्वप्न का ? यदि विचार करूँ तो इस पूरी घटना के मूल में था छल। मारीच का स्वर्ण मृग के रूप में उपस्थित होना छल था। रावण का भिक्षुक के रूप में पंचवटी आना और जानकी को लक्ष्मण-रेखा पार करने के लिए बाध्य करना छल था। तो क्या आज महायुद्ध के पंद्रहवें दिन ऐसे ही किसी छल को घटित होना है? कौन करेगा छल और किसके विरुद्ध ? क्या होने वाला है आज ? मेरी छाती में हृदय के स्थान पर जैसे समय धड़क रहा था।

- इसी पुस्तक से"

The Author

Rajeev ‘Acharya’

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