₹400
"कुछ व्यक्तित्व अपने समय से आगे बढ़कर आने वाली पीढ़ियों की चेतना बन जाते हैं। लोकनायक जयप्रकाश नारायण ऐसे ही जननायक थे, जिनके लिए देश की स्वतंत्रता का अर्थ प्रत्येक नागरिक के जीवन में सम्मान, न्याय और स्वाभिमान की स्थापना था।
'जयप्रकाश है नाम' उनके संघर्ष, वैचारिक विकास और जनसेवा को समर्पित जीवन की प्रेरक गाथा है। स्वतंत्रता आंदोलन की अग्नि परीक्षा से समाजवाद की राह तक, सर्वोदय की साधना से संपूर्ण क्रांति के आह्वान तक उनकी जीवनयात्रा भारतीय लोकतंत्र की आत्मा से संवाद करती है।
सत्ता के आकर्षण से दूर रहकर जनता की आवाज बनने वाले जयप्रकाश का जीवन हमें साहस, त्याग और नैतिक प्रतिबद्धता का अर्थ समझाता है। यह जीवनी पाठकों को उस व्यक्तित्व से परिचित कराती है, जिसने युवाओं में परिवर्तन का विश्वास जगाया और अन्याय के सामने झुकने से इनकार किया।
यह पुस्तक उस भारत की खोज भी है, जिसका सपना जयप्रकाश ने देखा और जिसके लिए अपना जीवन समर्पित किया।"