Prabhat Prakashan, one of the leading publishing houses in India eBooks | Careers | Publish With Us | Dealers | Download Catalogues
Helpline: +91-7827007777

Gaon-Gaon Ki Kahaniyan   

₹300

  We provide FREE Delivery on orders over ₹1500.00
Delivery Usually delivered in 5-6 days.
Author Dr. Pramod Kumar Agrawal
Features
  • ISBN : 9789384343958
  • Language : Hindi
  • Publisher : Prabhat Prakashan
  • Edition : Ist
  • ...more

More Information about International Finance: Theory and Policy, 10th ed.

  • Dr. Pramod Kumar Agrawal
  • 9789384343958
  • Hindi
  • Prabhat Prakashan
  • Ist
  • 2019
  • 152
  • Hard Cover

Description

‘गाँव-गाँव की कहानियाँ’ डॉ. प्रमोद कुमार अग्रवाल का द्वितीय कहानी-संग्रह है। प्रस्तुत कहानी संग्रह में सोलह कहानियाँ संकलित हैं, जिसमें कुछ लंबी, कुछ मध्यम तथा कुछ छोटी कहानियाँ हैं। सभी कहानियों का विषय पृथक्-पृथक् है। इन कहानियों में लेखक ने हिंदी साहित्य के कुछ अनछुए विषयों को चुना है। ‘ग्राम प्रधान की प्रेमिका’, ‘पट्टादार ननुआ’, ‘बटाईदार काने खाँ’, ‘विडंबना’, ‘वृद्धा’, ‘सूरज ’ कहानियाँ ग्रामीण भारत को सजीव उपस्थित करती हैं, जबकि ‘नगेन सब्जीवाला’ तथा ‘इस्माइल मिस्त्री’ कहानियाँ महानगरीय परिवेश पर आधारित हैं। ‘राजू-ऑपरेटर ’ तथा ‘चाय की दुकान’ कहानियों में कस्बे की पृष्ठभूमि का स्पंदन है।
‘सत्तर वर्षीय मुकदमा’ तथा ‘न्याय की खोज में अन्याय’ कहानियाँ भारतीय न्याय-व्यवस्था पर कटाक्ष हैं। ‘अरावली और ऐरावत’ और ‘रणनीति’ क्रमशः हाथियों तथा बंदरों के जीवन पर आधारित हैं। सभी कहानियों में लेखक का वैविध्यपूर्ण अनुभव, विज्ञान का स्पर्श तथा जीवन के प्रति उनका सकारात्मक दर्शन प्रतिबिंबित होता है। वे अपनी कहानियों के माध्यम से हिंदी साहित्य में लोक संग्रहात्मक कहानियों का नया दौर आरंभ कर रहे हैं, जो कुछ समय से विलुप्त सा हो रहा था।

____________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________

अनुक्रम

आत्मनेपद —Pgs. 7

लेखकीय —Pgs. 9

1.  पट्टादार ननुआ —Pgs. 15

2.  विडंबना —Pgs. 19

3.  अरावली और ऐरावत —Pgs. 24

4.  इस्माइल मिस्त्री —Pgs. 31

5.  नगेन सब्जीवाला —Pgs. 38

6.  पंचायत प्रधान की प्रेमिका —Pgs. 51

7.  राजू ऑपरेटर —Pgs. 65

8.  सत्तर वर्षीय मुकदमा —Pgs. 73

9.  बँटाईदार काने खाँ —Pgs. 86

10.  चाय की दुकान —Pgs. 91

11.  न्याय की खोज में अन्याय —Pgs. 96

12.  रणनीति —Pgs. 107

13.  वृद्धा —Pgs. 117

14.  सूरज —Pgs. 121

15.  गली बिकती है —Pgs. 126

16.  विदेश में नौकरी —Pgs. 134

The Author

Dr. Pramod Kumar Agrawal

डॉ. प्रमोद कुमार अग्रवाल ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से सन् 1973 में एल एल.बी. में प्रथम स्थान प्राप्त किया तथा डी.फिल (विधि) की उपाधि अर्जित की। डॉ. अग्रवाल ने कोलकाता विश्वविद्यालय से एल.एल.एम. किया। कुछ समय विधि में अध्यापन कार्य करने के पश्चात् डॉ. अग्रवाल 34 वर्षों तक भारतीय प्रशासनिक सेवा में कार्यरत रहे।
डॉ. अग्रवाल भारत सरकार के न्याय विभाग में 1987 से 1992 तक संयुक्त सचिव रहे, जहाँ वे न्यायिक सुधारों से संबंधित रहे।
आई.ए.एस. से अवकाश ग्रहण करने के पश्चात् डॉ. अग्रवाल चार वर्ष भारत की अग्रगण्य विधि संस्था खेतान एंड कंपनी में साझीदार तथा रियल इस्टेट अनुभाग के अध्यक्ष रहे। वर्तमान में डॉ. प्रमोद कुमार अग्रवाल नई दिल्ली स्थित विधि संस्था ‘वैश ग्लोबल’ के प्रबंध साझीदार हैं तथा स्वतंत्र लेखन में संलग्न हैं। डॉ. अग्रवाल हिंदी के प्रतिष्ठित साहित्यकार हैं। हाल ही में हिंदी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग द्वारा ‘साहित्य महोपाध्याय’ उपाधि से सम्मानित।
डॉ. अग्रवाल की हिंदी व अंग्रेजी में लगभग साठ पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें अंग्रेजी भाषा में डॉ. के.एन. चतुर्वेदी के साथ ‘कमेंटरी ऑन दि कॉन्स्टीट्यूशन ऑफ इंडिया’ भी सम्मिलित है।
संपर्क सूत्र : 105, सेंतूलाल सर्राफ  रोड, बरूआसागर, जि. झांसी-284201 (उ.प्र.)

 

Customers who bought this also bought

WRITE YOUR OWN REVIEW