₹350
"छत्तीसगढ़ के हृदय में फैला दंडकारण्य केवल एक प्राचीन जंगल नहीं, बल्कि रहस्यों, और अनकही शक्तियों से भरी एक ऐसी दुनिया है, जहाँ हर पगडंडी किसी भूली हुई कहानी तक ले जाती है। इसी रहस्यमय वन की ओर खिंची चली आती है समीरा; एक आधुनिक जिज्ञासु और निडर युवती, जिसके हाथ में कैमरा है और मन में अनजाने को जानने की तीव्र लालसा। लेकिन दंडकारण्य की गहराइयों में उतरना केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि समय, मिथक और भय के बीच प्रवेश करना है।
जैसे-जैसे समीरा आगे बढ़ती है, उसे एक अनदेखी उपस्थिति का मार्गदर्शन मिलने लगता है। अतीत की आवाजें उसे पुकारती हैं, छायाएँ उसके सामने आकार लेने लगती हैं, और वह एक ऐसे संसार में पहुँच जाती है, जहाँ इतिहास और लोककथा की सीमाएँ धुँधली हो जाती हैं। यह जंगल उससे केवल साहस नहीं माँगता, बल्कि उसके विश्वास, उसकी समझ और उसके अस्तित्व तक को चुनौती देता है। यहाँ हर मोड़ पर एक प्रश्न है, हर सन्नाटे में एक संकेत, और हर रहस्य के पीछे छिपा है शक्ति, स्त्रीत्व, संघर्ष और अस्तित्व का एक गहरा सच।
'दंडकारण्य : मातृसत्ता का जंगल' एक सम्मोहक फिक्शन कथा है, जो रहस्य, संवेदना, साहस और खो चुकी दुनिया की हॉन्टेड ब्यूटी को बेहद प्रभावशाली ढंग से पिरोती है। यह केवल एक जंगल की कहानी नहीं, बल्कि उन अनसुनी आवाजों की दास्तान है, जो समय के अँधेरों में भी जीवित रहती है।
दंडकारण्य में प्रवेश कीजिए, मगर सावधान रहिए, क्योंकि यह यात्रा आपको वैसा नहीं लौटने देगी, जैसा आप पहले थे।"