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To Buy this Book Main Shabari Hoon Ram Ki
"मैं शबरी हू राम की पुस्तक" इसके लेखन में मैंने स्वयं भी एक शबरी के रूप में जीने का प्रयास किया और सोचा कि वो भी एक शबरी थी तो क्या मैं भी एक शबरी हूँ?’’
यह उतना आसान नहीं था, पर कठिन भी नहीं था। अगर वह एक शबरी थी तो हर नारी एक शबरी है और हर पुरुष में भी शबरी-तत्त्व समान रूप से हैं। पाठकगण शायद इससे सहमत न हों, पर यदि हम इस पक्ष पर ग़ौर करेंगे तो संभवतः आप मुझसे सहमत ज़रूर होंगे।
श्री रामचरितमानस के इस अत्यंत महत्त्वपूर्ण पात्र को अपने भीतर और अपने आस-पास तलाश करने का प्रयास करें। यदि मैं कहूँ कि प्रत्येक माँ, पत्नी, बहन एक शबरी है और उसी प्रकार से प्रत्येक पिता, पति एवं भाई में भी शबरी के सभी गुण विद्यमान हैं तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। केवल थोड़े से विश्लेषण मात्र से ही हमें इस का भान हो जाएगा कि हम सभी में राम भी हैं और शबरी भी
डॉ. उर्वशी अग्रवाल 'उर्वी'—शब्द ही ब्रह्मांड है और ब्रह्मांड ही शब्द है। यदि ब्रह्मांड न होता तो शब्द न होता और यदि शब्द न होता तो संभवतः यह ब्रह्मांड भी न होता। आदिकाल से ही शब्द का एक विशेष महत्त्व है और मैंने एक कवि रूप में शब्दों के इसी महत्त्व को समझा और पाया कि सही शब्दों के चयन से और व भी पद्य रूप में अधिक प्रभाव डालता है और बस यहीं से मेरी काव्ययात्रा प्रारंभ हुई, जो निरंतर अविरल चल रही है।
गत कुछ वर्षों में सृष्टि के आशीर्वाद से कविता के साथ-साथ गीत-गजल, दोहा-चौपाई की विधा पर लिखना शुरू किया। महिला विषयों, विशेषकर उनकी विभिन्न भावनाओं को कविताओं, गजलों, दोहों और चौपाइयों के माध्यम से प्रस्तुत करती आ रही हूँ। हिंदी के अतिरिक्त सरैकी भाषा में भी काव्य सृजन। आकाशवाणी द्वारा आयोजित हिंदी व सरैकी के कई काव्य प्रसारणों व कविता पाठ में सम्मिलित हुई हूँ। अनेक टी.वी. चैनलों के कार्यक्रमों में कविताएँ व गजलें प्रस्तुत की हैं। अब तक लगभग एक हजार से अधिक हिंदी कविताओं व पच्चीस सौ से अधिक दोहों का सृजन ।
लड़कियों व महिलाओं को सुरक्षा के प्रति जागरूक करने के लिए अपनी 'हर नारी की अंतर्वेदना मे तो' कविता के माध्यम से विभिन्न विद्यालयों, कॉलेजों आदि में कार्यशालाओं में प्रस्तुति की है, जो काफी चर्चित रही है और जिनकी लगातार माँग रहती है।
प्रकाशित कृतियाँ : व्यथा कहे पांचाली, मैं शबरी हूँ राम की, अंतर्मन की पाती : सुनो ना ! हँसली चाँद की, यादों की कंदील, सारा कमाल उसका है, खुशबू तेरे खयाल की।
आगामी पुस्तकें : हर नारी की अंतर्वेदना : मी टू, बेटी तू दुर्गा बन जाना, मैंने कहा''' उसने कहा''', पाँच गजल-संग्रह।
संप्रति : वर्तमान में सुविख्यात हिंदी साहित्यिक पत्रिका 'साहित्य अमृत' की उप-संपादिका हैं।
अध्यक्षा: Defence and Security Alert (DSA) Magazine