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Bharatiya Videsh Neeti (PB)   

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Author J N Dixit
Features
  • ISBN : 9789350481554
  • Language : Hindi
  • ...more

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  • J N Dixit
  • 9789350481554
  • Hindi
  • Prabhat Prakashan
  • 2018
  • 408
  • Soft Cover

Description

प्रस्तुत पुस्तक में भारत के पूर्व विदेश सचिव श्री जे.एन. दीक्षित द्वारा पचास वर्षो की अवधि के विस्तृत फलक पर भारतीय विदेश नीति के विभिन्न चित्र सशक्‍त तथा प्रभावशाली ढंग से उकेरे गए हैं ।
लेखक ने 1947 को भारतीय विदेश नीति का आरंभ काल माना है । इन्होंने बताया है कि पं. जवाहरलाल नेहरू ने भारत की विदेश नीति का मूलाधार रखा तथा इसके बाद उनके उत्तराधिकारियों ने इस दिशा में किस प्रकार से व्यापक और महत्त्वपूर्ण योगदान दिया । इस महत्त्वपूर्ण आख्यान का वर्णन करते समय लेखक ने कालक्रमानुसार भारत की विदेश नीति के विविध पक्षों को उजागर किया है । इसके साथ ही उन पक्षों के राष्‍ट्रीय तथा अंतरराष्‍ट्रीय स्तर पर पड़नेवाले प्रभावों का भी विवेचन किया है तथा ऐसी युगांतकारी घटनाओं को शामिल किया है जिनका भारतीय विदेश नीति की प्राथमिकताओं पर प्रभाव पड़ा है । इसके  अतिरिक्‍त इस पुस्तक में उन घटनाओं के परिणामों तथा प्रतिक्रियाओं का भी विश्‍लेषण किया गया है । उदाहरण के तौर पर-सन् 1947-48, 1965 तथा 1971 में भारत-पाक युद्ध; संयुक्‍त राष्‍ट्र का संदेहास्पद रवैया तथा कश्मीर का मुद‍्दा; 1962 में भारत-चीन युद्ध; 1979 में अफगानिस्तान पर सोवियत संघ का कब्जा; महाशक्‍त‌िशाली सोवियत संघ का विघटन; कश्मीर की समस्या तथा पाकिस्तान की ' परोक्ष युद्ध ' की कार्यनीति; 1991 में खाड़ी युद्ध; मई 1998 में भारत-पाक द्वारा किए गए परमाणु परीक्षण । इस पुस्तक में विश्‍व के विभिन्न देशों-विशेष रूप से संयुक्‍त राज्य अमेरिका, सोवियत संघ, चीन तथा पाकिस्तान के साथ भारत के संबंधों का आलोचनात्मक मूल्यांकन करते हुए घटनाओं के संदर्भ में अंतरराष्‍ट्रीय संबंधों का विशद विवेचन किया गया है । भारतीय विदेश नीति को आधार बनाकर लिखी गई यह पुस्तक निस्संदेह एक उत्कृष्‍ट कृति है ।

 

The Author

J N Dixit

जे.एन. दीक्षित का जन्म चेन्नई (मद्रास) में हुआ था । आपके माता-पिता स्वतंत्रता सेनानी थे, इस कारण से पूरे परिवार को देश के अलग- अलग भागों में रहना पड़ता था; अत: आपने देश के अनेक भागों में शिक्षा प्राप्‍त की । आपकी स्नातकोत्तर शिक्षा दिल्ली में पूरी हुई । आपके अध्ययन के विषय ' अंतरराष्‍ट्रीय विधि ' तथा ' अंतरराष्‍ट्रीय संबंध ' थे । आप सन् 1958 से 1994 तक भारतीय विदेश सेवा में सेवारत रहे । अपने इस कार्यकाल में आपने दक्षिणी अमेरिका, उत्तरी अमेरिका, पश्‍च‌िमी यूरोप तथा जापान आदि में भारतीय दूतावासों में उच्च पदों पर कार्य किया ।
भूटान, बँगलादेश, अफगानिस्तान, श्रीलंका तथा पाकिस्तान में आपने भारत के प्रमुख राजनयिक के रूप में कार्य किया । इसके अतिरिक्‍त विदेश मंत्रालय के मुख्यालय में भी सेवा की ।
आप विदेश मामलों पर देशी-विदेशी टेलीविजन चैनलों के लोकप्रिय विश्‍लेषक भी हैं । आप विदेश नीति, सुरक्षा, शस्त्र नियंत्रण व निरस्त्रीकरण पर लगभग पंद्रह सौ लेख और आठ पुस्तकें लिख चुके हैं । आप भारतीय विदेश सेवा संस्थान में शिक्षण कार्य करते हैं और सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च में अतिथि प्रोफेसर भी हैं । आप यूनाइटेड सर्विसेस इंस्टीट्यूशन ऑफ इंडिया, दिल्ली पॉलिसी ग्रुप एवं नेहरू स्मारक संग्रहालय व पुस्तकालय की कार्यकारी परिषद् के वरिष्‍ठ सदस्य हैं ।

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