₹150
"भारत ने देश की स्वतंत्रता के लिए अंग्रेजों से कई संघर्ष किए, जिनमें सन् 1857 की सशस्त्र क्रांति महत्त्वपूर्ण है, लेकिन देश को आजादी अंततोगत्वा सन् 1947 में मिली। आजादी के तौर-तरीके और द्विराष्ट्र के सिद्धांत को लेकर उस समय के नेतृत्व ने कई ऐतिहासिक भूलें कीं, जिसकी टीस आज भी भारत के जनमानस में देखने को मिलती है। स्वाधीनता के बाद से लेकर आज तक देश के प्रधानमंत्री रहे नेतृत्वकर्ताओं के संबंध में कई ऐसी समकालीन बातें हैं, जिनका सार अल्प शब्दों में इस पुस्तक में सँजोया गया है।
पुस्तक का आशय किसी भी राजनीतिक दल या वर्ग विशेष की भावनाओं को ठेस पहुँचाने का नहीं है; वरन् इस पुस्तक का निष्कर्ष यह है कि राष्ट्र के सर्वांगीण विकास, एकता-अखंडता, आर्थिक, रक्षाक्षेत्र, इन्फ्रास्ट्रक्चर, विदेश नीति, आंतरिक सुरक्षा तथा भारतवर्ष के सांस्कृतिक पुनर्जागरण के जो कार्य आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कर रहे हैं, वे यदि पूर्व के हमारे शीर्ष नेतृत्व ने किए होते तो आज भारत की दशा-दिशा भिन्न होती। हम बहुत पहले ही विकसित भारत बन जाते और विश्व की बड़ी आर्थिक शक्ति भी। ऐसे कई काम हैं, जो आज मोदीजी के नेतृत्व में किए जा रहे हैं, वह अगर पुराने नेतृत्व द्वारा किए जाते तो आज देश की तस्वीर कुछ और ही होती।"