Prabhat Prakashan, one of the leading publishing houses in India eBooks | Careers | Events | Publish With Us | Dealers | Download Catalogues
Helpline: +91-7827007777

Bhaj Govindam   

₹350

In stock
  We provide FREE Delivery on orders over ₹1500.00
Delivery Usually delivered in 5-6 days.
Author Rahul Singh Rathore
Features
  • ISBN : 9788168272170
  • Language : Hindi
  • Publisher : Prabhat Prakashan
  • Edition : 1st
  • ...more

More Information

  • Rahul Singh Rathore
  • 9788168272170
  • Hindi
  • Prabhat Prakashan
  • 1st
  • 2026
  • 192
  • Soft Cover
  • 200 Grams

Description

"भज गोविन्दम्' एक पुस्तक नहीं है, बल्कि एक भाव है। यदि भगवान् राम सनातन संस्कृति की आत्मा हैं तो भगवान् कृष्ण उस संस्कृति के अभिभावक और उद्धारक हैं। आज जिस राम को हम लोग जानते हैं, उन पर कृष्ण का प्रभाव है। भगवान् कृष्ण उपनिषदों के दर्शन को 'श्रीमद्भगवद्गीता' में प्रस्तुत कर रहे हैं, जिसकी स्वाभाविक परिणति होती है कि वे स्वयं के भगवान् होने की घोषणा कर देते हैं। वह जिस आत्मविश्वास से स्वयं को 'सर्वलोकमहेश्वरम्', अर्थात् संपूर्ण लोकों के ईश्वरों के भी ईश्वर घोषित करते हैं, वह दुर्लभ है। इससे पहले ऐसा कार्य किसी अवतार ने नहीं किया था।

चैतन्य महाप्रभु की कुंडली का जैसा विशद विश्लेषण इस पुस्तक में किया गया है, इससे पहले ऐसा कहीं उपलब्ध नहीं है। इसमें महाभारत में उल्लिखित पांडवों के जन्म नक्षत्रों की भी विशद व्याख्या की गई है।

इस पुस्तक का अंतिम लेख 'जितसङ्गदोषा' तो प्रत्येक मनुष्य को एक बार अवश्य पढ़ना चाहिए। इसमें गीता में भगवान् कृष्ण के मुख से निकले इस शब्द को अध्यात्म से लेकर संसार तक के परिप्रेक्ष्य में उदाहरण देकर विस्तार से समझाया गया है। जो व्यक्ति एक बार इसे समझ लेगा, वह कुसंग करने से काँपने लगेगा। आज का जो युवा इसे अच्छे से आत्मसात् कर लेगा, उसे अभिभावकों को बलात् चरित्रवान बनाए रखने के लिए प्रवचन नहीं देना पड़ेगा।

वह स्वयं कुसंग में चरित्र के पतन करने से भयाक्रांत हो जाएगा। उसके पास अपने को कुसंग से बचाए रखने के अतिरिक्त कोई विकल्प नहीं बचेगा।"

The Author

Rahul Singh Rathore

Customers who bought this also bought

WRITE YOUR OWN REVIEW