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BAS YAHI SWAPNA, BAS YAHI LAGAN

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Author Jai Shankar Mishra
Features
  • ISBN : 9789350481455
  • Language : Hindi
  • Publisher : Prabhat Prakashan
  • Edition : 2012
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  • Jai Shankar Mishra
  • 9789350481455
  • Hindi
  • Prabhat Prakashan
  • 2012
  • 2012
  • 96
  • Hard Cover
  • 175 Grams

Description

प्रस्तुत कविता-संग्रह 'बस यही स्वप्न, बस यही लगन’ श्री जय शंकर मिश्र की काव्य-यात्रा का पंचम सोपान है। इससे पूर्व की रचनाएँ 'यह धूप-छाँव, यह आकर्षण’ , 'हो हिमालय नया, अब हो गंगा नई’ , 'चाँद सिरहाने रख’ तथा 'बाँह खोलो, उड़ो मुक्‍त आकाश में’ साहित्य- जगत् में अत्यधिक रुचि, उल्लास एवं संभावना के साथ स्वीकार की गई हैं। अपनी सहजता, सरलता एवं आह्लदमय संदेश के साथ-साथ इन रचनाओं में अंतर्निहित युग-मंगल की कामना, जीवन को सौंदर्यमय एवं शिवमय बनाने की भावना रचनाकार को एक विशिष्ïट पहचान देती है। इस संग्रह की रचनाएँ विविध स्वप्न, अनुभव, आशा-निराशा, स्नेह-प्रीति, प्रणय व जन-जन के उन्नयन की आशा, आकांक्षा एवं प्रयास पर आधारित भावनाओं का सशक्‍त प्रतिनिधित्व करती हैं। इस काव्य संग्रह में आशा-विश्‍वास का प्रीतिकर स्वर व्याप्त है। इन रचनाओं में प्रकृति चित्रों के माध्यम से जीवन के उल्लास, प्रेम, सौंदर्य एवं शिवं-सुंदरम की अत्यंत मनोरम अभिव्यक्‍ति हुई है। कवि जीवन-सौंदर्य में निर्बाध बहना चाहता है। इन रचनाओं में मानवीय चिंतन, जिजीविषा, सौंदर्य के प्रति पावन भाव आदि के जो स्वर गुंजित हुए हैं, वे आज की व्यवस्था में सर्वाधिक वांछनीय हैं; परंतु इन दिनों काव्य रचनाओं में कम ही दिखाई देते हैं। अनुभूति की सघनता एवं यथार्थ के संश्लेष से सृजित रचनाओं की विविधता, सरलता एवं सहजता कवि की असीम संभावनाओं की भावभूमि है।

The Author

Jai Shankar Mishra

श्री जय शंकर मिश्र एक अत्यंत लोकप्रिय एवं कुशल प्रशासनिक अधिकारी के साथ-साथ अत्यंत संवेदनशील व्यक्‍ति एवं रचनाकार के रूप में भी जाने जाते हैं। उत्तर प्रदेश शासन एवं भारत सरकार के अनेक महत्त्वपूर्ण तथा चुनौतीपूर्ण दायित्वों का अत्यंत सजगता, क्षमता एवं कुशलता से निर्वहन करने के साथ-साथ संस्कृति एवं साहित्य की अनेक विधाओं में श्री मिश्र की अत्यधिक अभिरुचि है।
विभिन्न भाषाओं में लिखे जा रहे साहित्य के पठन-पाठन के अतिरिक्‍त भारतीय वाड.मय, उपनिषदों एवं दार्शनिक ग्रंथों के अध्ययन में उनकी गहरी अभिरुचि है। पूर्व में प्रकाशित चार काव्य-संग्रहों के अतिरिक्‍त श्री मिश्र की अंग्रेजी भाषा में ‘ए क्वेस्ट फॉर ड्रीम सिटीज’, ‘महाकुंभ : द ग्रेटेस्ट शो ऑन अर्थ’, ‘हैप्पीनेस इज ए चॉइस चूज टू बी हैप्पी’ एवं इसका हिंदी भावानुवाद ‘24×7 आनंद ही आनंद’ आदि प्रकाशित हो चुकी हैं। ये रचनाएँ भी सुधी पाठकों द्वारा अत्यधिक अभिरुचि एवं आह्लाद के साथ स्वीकार की गई हैं।

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