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Author Jai Shankar Mishra
Features
  • ISBN : 9788173156618
  • Language : Hindi
  • Publisher : Prabhat Prakashan
  • Edition : 1st
  • ...more

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  • Jai Shankar Mishra
  • 9788173156618
  • Hindi
  • Prabhat Prakashan
  • 1st
  • 2009
  • 108
  • Hard Cover

Description

प्रस्तुत कविता संग्रह ‘बाँह खोलो, उड़ो मुक्‍त आकाश में’
श्री जय शंकर मिश्र की काव्य-यात्रा का चतुर्थ सोपान है। इससे पहले उनके तीन काव्य-संग्रह ‘यह धूप-छाँव, यह आकर्षण’, ‘हो हिमालय नया, अब हो गंगा नई’ तथा ‘चाँद सिरहाने रख’ प्रकाशित हो चुके हैं। श्री मिश्र की कविताएँ काव्य-जगत् में अत्यंत आह्लाद एवं नई आशा, नई आकांक्षा के साथ स्वीकार की गई हैं। इन रचनाओं ने अपनी एक अलग पहचान बनाई है।
इस संग्रह की कविताओं में जहाँ प्रकृति अपनी संपूर्ण विविधता एवं समग्रता के साथ स्पंदित होती हुई राग-विराग, हर्ष-शोक, उल्लास-अवसाद को प्रतिबिंबित करती है, वहीं अनेक रचनाएँ जीवन, परिवेश, प्रीति-प्रणय तथा संबंधों की प्रगाढ़ता के लौकिक एवं दार्शनिक पक्षों को भी आत्मसात् करती आगे बढ़ती हैं। परंतु इस संग्रह में श्री मिश्र की रचनाओं का परम वैशिष्‍ट्य यह है कि जीवन की समस्त जटिलताओं के बीच भी वे अनवरत रूप से अगणित स्वप्नों को समेट मुक्‍त आकाश में नए क्षितिज, नए लक्ष्य, नई संभावनाओं तथा नई रचनाओं की तलाश में, नए सहपथिकों के साथ उड़ान भरने का सशक्‍त आह्वान करती हैं। संगृहीत रचनाएँ काव्य-जगत् की अनेक धाराओं को स्पर्श करते हुए सुधी पाठकों के मन-प्राण को अनुनादित करने के साथ ही उनके बौद्धिक धरातल को भी उद्वेलित करने में सक्षम प्रतीत होती हैं।

The Author

Jai Shankar Mishra

श्री जय शंकर मिश्र एक अत्यंत लोकप्रिय एवं कुशल प्रशासनिक अधिकारी के साथ-साथ अत्यंत संवेदनशील व्यक्‍ति एवं रचनाकार के रूप में भी जाने जाते हैं। उत्तर प्रदेश शासन एवं भारत सरकार के अनेक महत्त्वपूर्ण तथा चुनौतीपूर्ण दायित्वों का अत्यंत सजगता, क्षमता एवं कुशलता से निर्वहन करने के साथ-साथ संस्कृति एवं साहित्य की अनेक विधाओं में श्री मिश्र की अत्यधिक अभिरुचि है।
विभिन्न भाषाओं में लिखे जा रहे साहित्य के पठन-पाठन के अतिरिक्‍त भारतीय वाड.मय, उपनिषदों एवं दार्शनिक ग्रंथों के अध्ययन में उनकी गहरी अभिरुचि है। पूर्व में प्रकाशित चार काव्य-संग्रहों के अतिरिक्‍त श्री मिश्र की अंग्रेजी भाषा में ‘ए क्वेस्ट फॉर ड्रीम सिटीज’, ‘महाकुंभ : द ग्रेटेस्ट शो ऑन अर्थ’, ‘हैप्पीनेस इज ए चॉइस चूज टू बी हैप्पी’ एवं इसका हिंदी भावानुवाद ‘24×7 आनंद ही आनंद’ आदि प्रकाशित हो चुकी हैं। ये रचनाएँ भी सुधी पाठकों द्वारा अत्यधिक अभिरुचि एवं आह्लाद के साथ स्वीकार की गई हैं।

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