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Seengawale Gadhe   

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Author Prem Janmejay
Features
  • ISBN : 9788196086442
  • Language : Hindi
  • Publisher : Prabhat Prakashan
  • Edition : 1st
  • ...more

More Information

  • Prem Janmejay
  • 9788196086442
  • Hindi
  • Prabhat Prakashan
  • 1st
  • 2023
  • 176
  • Hard Cover
  • 200 Grams

Description

"प्रेम जनमेजय से मिलकर, बात कर, कभी नहीं लगता कि ये व्यंग्य विधा की राह के पहुँचे हुए मुसाफिर हैं। ऐसा ही श्रीलाल शुक्लजी के साथ था। वे कभी बातचीत में व्यंग्य नामक हथियार का इस्तेमाल नहीं करते थे। ये ऐसे व्यंग्य-गुरु हैं, जो अपनी तिरछी नजर पर मृदुता, मस्ती और मितभाषिता का चश्मा लगाए रहते हैं।

कुछ लोगों का खयाल है कि व्यंग्य लेखक एक किस्म के कार्टूनकार होते हैं, जिन्हें सारी दुनिया आँकी-बाँकी दिखाई देती है। एकदम गलत धारणा है यह। जैसे कविता, कहानी, उपन्यास नाटक और निबंध, साहित्य की विधाएँ हैं, वैसे ही व्यंग्य तथा हास्य, व्यंग्य की विधाएँ हैं। कमजोर हाथों में पडक़र ये विद्रूप और फूहड़ हँसी-ठट्ठा का रूप लेती होंगी, लेकिन प्रेम जनमेजय उन इलाकों में जाते ही नहीं हैं। वे हरिशंकर परसाई, शरद जोशी और श्रीलाल शुक्ल की परंपरा में व्यंग्य विधा में संलग्न हैं। उनके लिए व्यंग्य एक गंभीर कार्य और चिंतन है, जिससे वे समाज की विसंगतियों और समय के अंतर्विरोधों पर रोशनी डाल सकें। परिवर्तन काल सुविधा के साथ-साथ सक्रांति काल भी लाता है।

प्रेम जनमेजय ने बहुत समझदारी और गहन अध्ययन से अपनी साहित्य-विधा चुनी है। व्यंग्य विधा पर चाहे जितना हमला किया जाए, सब जानते हैं कि बिना व्यंग्य-विनोद के कोई भी रचना पठनीय नहीं हो सकती। प्रेमजी में एक कथातत्त्व समानांतर चलता है। इसी कथा-जाल में वे धीरे से अपना काम कर जाते हैं। 
—ममता कालिया"

The Author

Prem Janmejay

जन्म : 18 मार्च, 1949, इलाहाबाद (उ.प्र.)।
प्रकाशित कृतियाँ : ग्यारह लोकप्रिय व्यंग्य संग्रह; व्यंग्य नाटक ‘सीता अपहरण केस’ का अनेक शहरों में विभिन्न नाट्य संस्थाओं द्वारा सफल मंचन। पिछले नौ वर्ष से व्यंग्य पत्रिका ‘व्यंग्य यात्रा’ के संपादक एवं प्रकाशक। नेशनल बुक ट्रस्ट द्वारा प्रकाशित ‘हिंदी हास्य व्यंग्य संकलन’ में श्री श्रीलाल शुक्ल के साथ सहयोगी संपादक। दो समीक्षात्मक पुस्तकें, बाल-साहित्य की तीन पुस्तकें व नव-साक्षरों के लिए आठ रेडियो नाटकों का लेखन। पुरस्कार : ‘पं. बृजलाल द्विवेदी साहित्य पत्रकारिता सम्मान’, ‘शिवकुमार शास्त्री व्यंग्य सम्मान’, ‘आचार्य निरंजननाथ सम्मान’, ‘व्यंग्यश्री सम्मान’, ‘हरिशंकर परसाई स्मृति पुरस्कार’, हिंदी अकादमी साहित्यकार सम्मान’। ‘हिंदी चेतना’, ‘व्यंग्य तरंग’, ‘कल्पांत’ एवं ‘यू.एस.एम पत्रिका’ द्वारा प्रेम जनमेजय पर केंद्रित अंक प्रकाशित।
संप्रति : एसोसिएट प्रोफेसर, कॉलेज ऑफ वोकेशनल स्टडीज, दिल्ली विश्वविद्यालय।

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