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हर मिसरे में लिपटा एक टुकड़ा ज़िंदगी का, हर नज़्म में ज़िंदगी का अक्स दिखता है
शेर वो सदा ज़हन में रहे सुने जो कहे, वाक़िआ ज़िंदगी से ये हमारा ही तो है
शराब ओ शबाब के फ़साने ग़ज़ल में लाज़िमी हैं, क़ाफ़िया ज़िंदगी में मिले लेकिन ज़रूरी तो नहीं है
मतला और मक़्ता के दरमियाँ नज़्म बहती है कहानी कोई किसी जिंदगी की सुनाती है
तखल्लुस में खोया कोई सुख नवर अंजाना सा, दास्ताँ ज़माने की कुछ हाल-ए-दिल सुनाता है
उर्दू नज़्मों और देवनागरी (हिंदी लिपि) में प्रस्तुत जीवन के अंश परिप्रेक्ष्य, अवलोकन, अनुभव और जीवन की यात्रा को सलाम।
सामाजिक प्रवृत्तियों, प्रेम, जीवन और रिश्तों पर एक दृष्टिकोण साझा करता है; राजनीति की स्थिति; निर्माता के साथ संवाद में शामिल होना सफलताओं और असफलताओं का आत्मसात्; आत्मविश्लेषण, शिकायतें, कृतज्ञता और शिकायतें।
जीवन सरल नहीं है, लेकिन यह पुस्तक उसे सरल शब्दों में प्रस्तुत करती है और कविता की लय। हिंदी-उर्दू कविता का एक मौलिक कार्य। एक भाषा, जिसे कभी रेख़्ता कहा जाता था।