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"गणित के क्षेत्र में भारत का महान् योगदान रहा है। यहाँ अनेक महान् गणितज्ञ पैदा हुए। आधुनिक भारत में भी यहाँ पर श्रीनिवास रामानुजम जैसे अद्भुत प्रतिभासंपन्न गणितज्ञों ने जन्म लिया, जिनकी धाक आज संपूर्ण विश्व मानता है।
इस पुस्तक में 125 भारतीय गणितज्ञों की जीवनियाँ दी गई हैं। इनमें कुछ गणितज्ञों, जैसे प्रो. राधाचरण गुप्त, प्रो. राम प्रकाश बंबाह, प्रो. सी.आर. राव, प्रो. जयंत विष्णु नर्लीकर, प्रो. मिहिर बरन बनर्जी, प्रो. इंद्रवीर सिंह पासी, प्रो. वी.एस. मंड्रेकर, प्रो. इंदुलता शुक्ला, प्रो. उदयभान तिवारी, प्रो. सत्यदेव, प्रो. एस. बालचंद राव आदि के नाम अति उल्लेखनीय हैं। अतः उपलब्ध सभी जीवनियों को समाहित करते हुए 'आधुनिक भारत के स्मरणीय गणितज्ञ' नाम से यह पुस्तक पाठकों के लिए प्रस्तुत है। यह कृति छात्रों, शोधार्थियों व गणित में रुचि रखने वाले सामान्य पाठकों के लिए भी समान रूप से उपयोगी होगी।"
वीरेंद्र कुमार का जन्म सन् 1948 ई. में उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जनपद के रुस्तमपुर गौतना नामक ग्राम में हुआ। इनकी प्रारंभिक शिक्षा गाँव में ही हुई। सन् 1958 ई. में ये अपने परिवार के साथ अलीगढ़ चले आए। इन्होंने सन् 1970 में आगरा विश्वविद्यालय से गणित विषय में एम.एस-सी. की डिग्री प्रथम श्रेणी के साथ प्राप्त की; सन् 1972 में आगरा विश्वविद्यालय से बी.एड. की डिग्री प्राप्त की। इन्होंने स्पेशल फंक्शंस के अंतर्गत कई शोध-पत्र प्रकाशित किए। सन् 1972 से लगातार 37 वर्ष इन्होंने मथुरा/हाथरस जनपद में इंटरमीडिएट के छात्रों को गणित विषय पढ़ाया। कुछ समय तक वे बुलंदशहर जनपद में प्रधानाचार्य पद पर भी रहे।
सन् 2009 में शिक्षा विभाग से सेवानिवृत्ति प्राप्त कर स्वाध्याय तथा लेखन कार्य में अपना समय व्यतीत करते हैं। गणित के क्षेत्र में इन्होंने वैदिक अंकगणित, वैदिक बीजगणित, गणित की रोचक बातें, सामान्य गणित पेचीदे प्रश्न, गणित शिक्षण में उपयोगी पटचित्र, कंसेप्ट चार्ट्स इन मैथेमैटिक्स तथा आधुनिक भारत के दिवंगत गणितज्ञ नामक पुस्तकें लिखी हैं जो प्रकाशित होकर खूब लोकप्रिय हुई हैं। गणित के अतिरिक्त इन्होंने 'मीठा बोलें सुखी रहें' नामक व्यक्तित्व विकास की पुस्तक लिखी है। अनेक पुस्तकें प्रकाशित होने की प्रतीक्षा में हैं।