Prabhat Prakashan, one of the leading publishing houses in India eBooks | Careers | Publish With Us | Dealers | Download Catalogues
Helpline: +91-7827007777

Bharat Ka Samvidhan   

₹700

In stock
  We provide FREE Delivery on orders over ₹1500.00
Delivery Usually delivered in 5-6 days.
Author Dr. Pramod Kumar Agrawal
Features
  • ISBN : 9789382901747
  • Language : Hindi
  • Publisher : Prabhat Prakashan
  • Edition : 1st
  • ...more

More Information about International Finance: Theory and Policy, 10th ed.

  • Dr. Pramod Kumar Agrawal
  • 9789382901747
  • Hindi
  • Prabhat Prakashan
  • 1st
  • 2018
  • 324
  • Hard Cover

Description

संविधान का राष्‍ट्रीय लोक-विमर्श आज भी लगभग पूरी तरह अंग्रेजी भाषा का मुखापेक्षी है। इस विमर्श में आम आदमी की छवि एवं उनके सरोकार तो नजर आते हैं, किंतु आम आदमी की भाषा सुनाई नहीं देती। इस ग्रंथ में हिंदी में विवेकसंगत एवं संतुलित संविधान-विमर्श के साथ ही आम आदमी की समझ में आनेवाली भाषा प्रयोग की गई है। संविधान-रचना की पृष्‍ठभूमि और व्याख्या की दृष्‍टि से यह ग्रंथ हिंदी भाषा में संविधान-साहित्य को एक अमूल्य और बेजोड़ उपहार है।
प्रस्तुत ग्रंथ में संविधान के विविध पक्षों पर सरल एवं सुबोध भाषा में प्रकाश डाला गया है। इसमें संविधान के उलझे हुए प्रश्‍नों के विवेचन के साथ-साथ संविधान के विषयों का अनुच्छेद-आधारित उल्लेख भी है। संविधान की रचना की पृष्‍ठभूमि देते हुए बताया गया है कि कई ‘अर्धवैधानिक’ नियम भी संविधान एवं शासन प्रबंध की व्यावहारिकता में महत्त्वपूर्ण होते हैं। उन सबको लेकर एक सांगोपांग एवं सर्वतोमुखी संवैधानिक विवेचन इस ग्रंथ में समाविष्‍ट है, जिसमें इतिहास है, राजनीति है, समाजशास्‍‍त्र है।
इस ग्रंथ की विशेषता है कि यह सरल, सुबोध एवं सुव्यवस्थित होने के साथ-साथ अध्ययनशील स्पष्‍टता, प्रामाणिकता एवं गुणवत्ता से भी संपन्न है। —डॉ. लक्ष्मीमल्ल सिंघवी

__________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________

विषय-सूची

 

दो शब्द—5

पुरोवाक्—7

1. संविधान-रचना की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि—13

2. भारतीय संविधान-सभा—38

3. संविधान-रचना की प्रक्रिया—47

4. भारतीय संविधान की प्रमुख विशेषताएँ —57

5. भारतीय संविधान की प्रकृति—67

6. उद्देशिका —73

7. संघ और उसका राज्यक्षेत्र—85

8. नागरिकता —94

9. मौलिक अधिकार —101

10. राज्य की नीति के निदेशक तत्त्व—123

11. मूल कर्तव्य—133

12. संघीय कार्यपालिका—140

13. भारतीय संसद् —168

14. संघ की न्यायपालिका—201

15. राज्य की कार्यपालिका—212

16. राज्य की न्यायपालिका—228

17. संघ राज्य-क्षेत्र—237

18. पंचायतें—239

19. नगरपालिकाएँ—243

20. संघ और राज्य के बीच संबंध—246

21. संघ एवं राज्यों के अधीन सेवाएँ—256

22. कुछ वर्गों के संबंध में विशेष उपबंध—261

23. समस्या राजभाषा की—265

24. आपात उपबंध—270

25. संविधान का संशोधन—274

26. विभिन्न आयोग—279

27. जम्मू एवं कश्मीर की शासन-व्यवस्था—287

28. संविधान समीक्षा आयोग : एक दृष्टि में—290

29. क्रमवार संविधान संशोधन—294

परिशिष्ट-1

अनुच्छेदवार संविधान का विषय निरूपण—312

परिशिष्ट-2

भारत के उपप्रधानमंत्री—338

परिशिष्ट-3

पदेन वरीयता अनुक्रम —339

परिशिष्ट-4

महिलाओं हेतु प्रमुख संवैधानिक प्रावधान —340

परिशिष्ट-5

महिलाओं से संबंधित प्रमुख अधिनियम —341

परिशिष्ट-6

बालकों हेतु प्रमुख संवैधानिक प्रावधान —343

परिशिष्ट-7

बालकों से संबंधित प्रमुख अधिनियम —344

परिशिष्ट-8

अल्पसंख्यक हेतु संवैधानिक प्रावधान —345

परिशिष्ट-9

अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजातियों से संबंधित संवैधानिक प्रावधान —346

परिशिष्ट-10

भारतीय संविधान एवं विकलांगों के अधिकार —349

परिशिष्ट-11

संसद् में बजट 351

The Author

Dr. Pramod Kumar Agrawal

डॉ. प्रमोद कुमार अग्रवाल ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से सन् 1973 में एल एल.बी. में प्रथम स्थान प्राप्त किया तथा डी.फिल (विधि) की उपाधि अर्जित की। डॉ. अग्रवाल ने कोलकाता विश्वविद्यालय से एल.एल.एम. किया। कुछ समय विधि में अध्यापन कार्य करने के पश्चात् डॉ. अग्रवाल 34 वर्षों तक भारतीय प्रशासनिक सेवा में कार्यरत रहे।
डॉ. अग्रवाल भारत सरकार के न्याय विभाग में 1987 से 1992 तक संयुक्त सचिव रहे, जहाँ वे न्यायिक सुधारों से संबंधित रहे।
आई.ए.एस. से अवकाश ग्रहण करने के पश्चात् डॉ. अग्रवाल चार वर्ष भारत की अग्रगण्य विधि संस्था खेतान एंड कंपनी में साझीदार तथा रियल इस्टेट अनुभाग के अध्यक्ष रहे। वर्तमान में डॉ. प्रमोद कुमार अग्रवाल नई दिल्ली स्थित विधि संस्था ‘वैश ग्लोबल’ के प्रबंध साझीदार हैं तथा स्वतंत्र लेखन में संलग्न हैं। डॉ. अग्रवाल हिंदी के प्रतिष्ठित साहित्यकार हैं। हाल ही में हिंदी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग द्वारा ‘साहित्य महोपाध्याय’ उपाधि से सम्मानित।
डॉ. अग्रवाल की हिंदी व अंग्रेजी में लगभग साठ पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें अंग्रेजी भाषा में डॉ. के.एन. चतुर्वेदी के साथ ‘कमेंटरी ऑन दि कॉन्स्टीट्यूशन ऑफ इंडिया’ भी सम्मिलित है।
संपर्क सूत्र : 105, सेंतूलाल सर्राफ  रोड, बरूआसागर, जि. झांसी-284201 (उ.प्र.)

 

Customers who bought this also bought

WRITE YOUR OWN REVIEW