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Vaikalpik Chikitsa Paddhatiyan   

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Author Rajkumar Pruthi
Features
  • ISBN : 8188140546
  • Language : Hindi
  • Publisher : Prabhat Prakashan
  • Edition : 1st
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More Information about International Finance: Theory and Policy, 10th ed.

  • Rajkumar Pruthi
  • 8188140546
  • Hindi
  • Prabhat Prakashan
  • 1st
  • 2012
  • 208
  • Hard Cover

Description

यदि आप चाय में अदरक व तुलसी की पत्ती डालकर पीते हैं या फिर एक दिन का उपवास रखते हैं, सिरदर्द में कनपटी पर मालिश करा रहे होते हैं, जोड़ों के दर्द में बर्फ का उपयोग कर रहे होते हैं या ट्रैफिक जाम से तनावग्रस्त होकर संगीत सुनना शुरू कर देते हैं—तो आप वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति के प्राकृतिक आरोग्य रूप का उपयोग कर रहे होते हैं। वैकल्पिक चिकित्सा पद्धतियाँ अब पूरे विश्‍व में प्रचलित हो गई हैं।
इन पद्धतियों के अनेक रूप हैं, जिनमें अस्थि चिकित्सा, ऑक्सीजन चिकित्सा, आयुर्वैदिक चिकित्सा, आहार चिकित्सा, उपवास चिकित्सा, ऊर्जा चिकित्सा, एक्यूप्रेशर चिकित्सा, एपी थेरैपी, एस्टोन-पैटर्निंग चिकित्सा, किण्वक चिकित्सा, घरेलू चिकित्सा, चुंबकीय चिकित्सा, जल चिकित्सा, तंत्रिका चिकित्सा, ध्यान चिकित्सा, ध्वनि चिकित्सा, पुष्प चिकित्सा, पेशीय चिकित्सा, प्रकाश चिकित्सा, प्राकृतिक चिकित्सा, मनोचिकित्सा, मालिश चिकित्सा, मूत्र चिकित्सा, यूनानी चिकित्सा, योग चिकित्सा, रस चिकित्सा, रेकी चिकित्सा, शाकाहारी चिकित्सा, सम्मोहन चिकित्सा, सुई चिकित्सा, सुगंध चिकित्सा, स्पर्श चिकित्सा, हर्बल चिकित्सा, होम्योपैथी चिकित्सा आदि चिकित्सा पद्धतियों को प्रस्तुत पुस्तक में शामिल किया गया है।
इन पद्धतियों में स्वास्थ्य के रक्षात्मक और प्रगतिशील पहलुओं पर वैज्ञानिक दृष्‍टि से प्रकाश डाला गया है।

The Author

Rajkumar Pruthi

दिल्ली विश्‍वविद्यालय से विधि, तदुपरांत कुरुक्षेत्र विश्‍वविद्यालय से पी-एच.डी. की उपाधि प्राप्‍त, जवाहरलाल नेहरू विश्‍वविद्यालय से अंतरराष्‍ट्रीय राजनीति में सर्टिफिकेट कोर्स। योग में गहन रुचि के चलते स्वामी विवेकानंद योग अनुसंधान केंद्र, बंगलौर से योग पद्धतियों में शोध। एक कुशल अध्यापक और शोधार्थी डॉ. राजकुमार 1970-1973 तक हरियाणा शिक्षा सेवा में कार्यरत रहे। 1973-1999 तक भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद् में उपनिदेशक (शोध) के पद से सेवानिवृत्त होने के बाद वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के सदस्य हैं।
बहुपठित एवं भ्रमणशील डॉ. राजकुमार ने अनेक राष्‍ट्रीय एवं अंतरराष्‍ट्रीय सेमिनारों एवं परिसंवादों में अपने आलेख प्रस्तुत किए हैं, जिनमें प्रमुख हैं—1993 में बनारस हिंदू विश्‍वविद्यालय में वार्षिक लेक्चर तथा 1994 में मद्रास विश्‍वविद्यालय में सर विलियम मायर लेक्चर। राष्‍ट्रीय एवं अंतरराष्‍ट्रीय ख्याति की अनेक अकादमिक संस्थाओं से संबद्ध डॉ. राजकुमार की अनेक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं।

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