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Vaidik Sanatan Hindutva   

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Author Manoj Singh
Features
  • ISBN : 9789352666874
  • Language : Hindi
  • Publisher : Prabhat Prakashan
  • Edition : 1st
  • ...more

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  • Manoj Singh
  • 9789352666874
  • Hindi
  • Prabhat Prakashan
  • 1st
  • 2018
  • 240
  • Hard Cover

Description

सनातन वह जीवनदर्शन है, जो प्रकृति को वश में करने का समर्थन नहीं करता। यों तो प्रकृति को पराजित करके उस पर कब्जा करना संभव नहीं। मगर इस तरह की सोच आसुरी चिंतन है, जबकि सनातन दैवीय चिंतन है। यहाँ इंद्रियों को वश में करने की बात होती है। सनातन लेने की नहीं देने की संस्कृति है। सनातन मृत नहीं, जीवंत है। स्थिर नहीं, सतत है। जड़ नहीं चैतन्य है। सनातन जीवनदर्शन भौतिक, शारीरिक, पारिवारिक, सामाजिक से ऊपर उठकर आत्मिक, आध्यात्मिक और भावनात्मक स्तर पर भी संतुष्ट करता है। यह उपभोग की नहीं उपयोग की संस्कृति है। यह लाभ-लोभ की नहीं, त्याग की संस्कृति है। यह भोग की नहीं, मोक्ष की संस्कृति है। यह बाँधता नहीं, मुक्त करता है।
सनातन हिंदू, भक्षक नहीं, प्रकृति रक्षक होता है। वैदिक सनातन हिंदुत्व एक प्रकृति संरक्षक संस्कृति है। ‘मैं सनातनी हूँ’ कहने का अर्थ ही होता है ‘मैं प्रकृति का पुजारी हूँ’।
सनातन जीवनदर्शन दानव को मानव बनाता है, मानव को देवता और देवता को ईश्वर के रूप में स्थापित कर देता है। 
सनातन सिर्फ स्वयं की बात नहीं करता, सदा विश्व की बात करता है। सिर्फ आज की बात नहीं करता, बीते हुए कल का विश्लेषण कर आने वाले कल के लिए तैयार करता है। इसलिए शाश्वत है, निरंतर है। आधुनिक मानव को सनातन के इस मूल मंत्र को पकड़ना होगा, तभी हम सनातन जीवनदर्शन को समझ पाएँगे।
—इसी पुस्तक से

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अनुक्रम

नेति-नेति — Pgs. 7

भाग-1 विज्ञान की कचरा-संस्कृति

अध्याय-1 वैज्ञानिकों की चेतावनी — Pgs. 15

अध्याय-2 1. प्रकृति और मनुष्य  — Pgs. 18

2. सरस्वती नदी और प्रलय — Pgs. 19

अध्याय-3 1. प्रकृति और विज्ञान — Pgs. 22

2. विज्ञान का कचरा — Pgs. 23

3. विज्ञान में मानवतावाद — Pgs. 26

अध्याय-4 1. मानव प्रगति और पर्यावरण — Pgs. 29

2. वन संपदा के दोहन से बिगड़ा पर्यावरण संतुलन — Pgs. 33

3. प्रदूषण युग में सिर्फ संरक्षण नहीं पर्यावरण संवर्धन की आवश्यकता — Pgs. 35

4. हम सिर्फ लेनेवाले, कुछ देनेवाले नहीं — Pgs. 37

भाग-2 वैदिक आर्य और सनातन संस्कृति

अध्याय-1 1. पाषाण युग — Pgs. 41

2. पाषाण देव से रुद्र का उद्भव — Pgs. 42

अध्याय-2 सिंधु-सरस्वती सभ्यता और वैदिक संस्कृति  — Pgs. 45

 • हिंदू — Pgs. 48

अध्याय-3 1. ऋग्वेद में नदियाँ, जल, कुआँ, सरोवर, समुद्र, वर्षा — Pgs. 53

अध्याय-4 1. सनातन :  कृषिप्रधान समाज — Pgs. 63

2. ऋतु परिवर्तन — Pgs. 66

अध्याय-5 1. समयकाल युग पंचांग — Pgs. 68

अध्याय-6 1. सनातन संस्कृति — Pgs. 81

2. सनातन धर्म — Pgs. 83

3. सनातन के मूल तत्त्व — Pgs. 87

अध्याय-7 1. संस्कृति में संस्कार — Pgs. 92

2. संस्कार — Pgs. 94

अध्याय-8 1. यज्ञ  — Pgs. 100

2. गायत्री मंत्र  — Pgs. 106

3. महामृत्युंजय — Pgs. 108

अध्याय-9 योग (योगा) — Pgs. 110

अध्याय-10 1. सनातन हिंदू—एक प्रकृति-प्रेमी — Pgs. 115

2. सनातन पर्व उत्सव में प्रकृति दर्शन — Pgs. 118

भाग-3 सनातन संस्कृति में प्रकृति

अध्याय-1 1. व्रत-पर्व-त्योहार — Pgs. 123

अध्याय-2 व्रत-उपवास  — Pgs. 127

अध्याय-3 1. अमावस्या  — Pgs. 129

2. सोमवती अमावस्या  — Pgs. 130

अध्याय-4 1. पूर्णिमा  — Pgs. 131

2. पूर्णिमा में उपवास — Pgs. 131

3. गुरु पूर्णिमा — Pgs. 132

4. वट पूर्णिमा — Pgs. 133

अध्याय-5 सूर्य-ग्रहण, चंद्र-ग्रहण — Pgs. 134

अध्याय-6 एकादशी व्रत — Pgs. 137

अध्याय-7 कुआँ पूजन — Pgs. 139

अध्याय-8 1. पीपल (पीपल पूजन) — Pgs. 142

2. नीम — Pgs. 144

3. केला — Pgs. 145

4. तुलसी/तुलसी पूजन — Pgs. 146

5. वटवृक्ष (बरगद की पूजा) — Pgs. 148

अध्याय-9 गौमाता/गो पूजन — Pgs. 151

अध्याय-10 मकर संक्रांति (लोहड़ी) — Pgs. 155

अध्याय-11 वसंत पंचमी — Pgs. 159

अध्याय-12 होली — Pgs. 161

अध्याय-13 रामनवमी — Pgs. 164

अध्याय-14 नागपंचमी — Pgs. 166

अध्याय-15 हरियाली तीज और हरियाली अमावस्या — Pgs. 169

अध्याय-16 छठ पूजा — Pgs. 171

अध्याय-17 आँवला नवमी — Pgs. 174

अध्याय-18 ओणम — Pgs. 176

अध्याय-19 रक्षाबंधन — Pgs. 178

अध्याय-20 श्रीकृष्ण जन्माष्टमी — Pgs. 180

अध्याय-21 श्राद्ध — Pgs. 182

अध्याय-22 1. नवरात्रे — Pgs. 185

2. विजयादशमी — Pgs. 186

अध्याय-23 1. दीपावली — Pgs. 189

2. गोवर्धन पूजा — Pgs. 191

अध्याय-24 शरद पूर्णिमा — Pgs. 193

अध्याय-25 सरहुल — Pgs. 195

अध्याय-26 देवशयनी एकादशी और देवउठनी एकादशी — Pgs. 197

अध्याय-27 नर्मदा परिक्रमा  — Pgs. 198

अध्याय-28 कुंभ मेला — Pgs. 201

अध्याय-29 महाशिवरात्रि — Pgs. 203

अध्याय-30 सनातन पर्वों का समाज शास्त्र — Pgs. 205

अध्याय-31 सनातन पर्वों का अर्थशास्त्र  — Pgs. 207

भाग-4 सनातन जीवनदर्शन

• वेद — Pgs. 215

• अहिंसा और धर्म — Pgs. 219

• शांति — Pgs. 220

• इंद्र — Pgs. 222

भाग-5 विश्व मानव की आधुनिक चुनौतियाँ

• सनातन धर्म बनाम अन्य — Pgs. 227

• राजनेता-पूँजीपति-धर्मगुरुओं का गठजोड़ — Pgs. 230

• बुद्धिजीवी और नायक — Pgs. 231

• आधुनिक हिंदुओं में कुरीतियाँ — Pgs. 232

• सीमाएँ (बाउंडरी) — Pgs. 235

• वॉल-ई (WALL-E) — Pgs. 237

The Author

Manoj Singh

मनोज सिंह
जन्म : 1 सितंबर, 1964 को आगरा (उ.प्र.) में।
शैक्षणिक योग्यताएँ : बी.ई. इलेक्ट्रॉनिक्स, एम.बी.ए.।
विभिन्न विश्वविद्यालयों, इंजीनियरिंग कॉलेज, मैनेजमेंट कोर्स एवं मास-कम्युनिकेशन से संबंधित शिक्षण संस्थानों में विशेषज्ञ व्याख्यान के लिए आमंत्रित।
प्रकाशित पुस्तकें : ‘चंद्रिकोत्सव’ (खंडकाव्य); ‘बंधन’, ‘कशमकश’, ‘हॉस्टल के पन्नों से’ (उपन्यास); ‘व्यक्तित्व का प्रभाव’, ‘चिंता नहीं चिंतन’ (लेख-संकलन);  ‘मेरी  पहचान’ (कहानी-संग्रह); ‘स्वर्ग यात्रा’ (कश्मीर से लद्दाख तक की यात्रा), ‘दुबई : सपनों का शहर’।
इ-मेल : sitemanojsingh@gmail.com

 

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