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Swayam Ki Ore : Ek Sadhak Ki Diary Se   

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Author Dr. Kusum Gaur
Features
  • ISBN : 9789352669974
  • Language : Hindi
  • Publisher : Prabhat Prakashan
  • Edition : 1st
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  • Dr. Kusum Gaur
  • 9789352669974
  • Hindi
  • Prabhat Prakashan
  • 1st
  • 2018
  • 256
  • Hard Cover

Description

पुस्तक ‘स्वयं की ओर : एक यात्रा’ एवं ‘आध्यात्मिक यात्रा : एक साधक की डायरी से’ दोनों एक ही साधक अर्थात् डॉ. कुसुम गौड़, जो कि अपनी स्वयं की अनुभूति करने के लिए इस यात्रा पर निकलती हैं, की अनुभूतियों का संग्रह 
है, जो क्रमशः अलग-अलग तरह से वर्णित है।
जहाँ ‘आध्यात्मिक यात्रा : एक साधक की डायरी से’ उन पद्यों का संकलन है, जो साधक को इस यात्रा के दौरान स्वयं अनुभूत होकर स्वयं की भावलहरियों से समय-समय पर प्रस्फुटित हुए तथा ‘स्वयं की ओर : एक यात्रा’ इस साधक की स्वयं की ओर क्रमिक गति व अलग-अलग स्तर पर हुई अनुभूतियों व उनकी समझ का वर्णन है।
इस आध्यात्मिक यात्रा के दौरान इस साधक को क्या-क्या परेशानियाँ आईं, कैसी-कैसी रुकावटें आईं, कैसे उनका निराकरण हुआ तथा कैसे उनसे निपटना हुआ, उनका वर्णन है।
वैसे तो ये दो अलग-अलग पुस्तक भी हो सकती हैं, परंतु इन दोनों को एक साथ रखने का उद्देश्य भी यही है कि पाठकगण ‘स्वयं की ओर : एक यात्रा’ में वर्णित अनुभूतियों व उनकी समझ को ‘आध्यात्मिक यात्रा : एक साधक की डायरी से’ में लिखे गए पद्य तथा उसके लिखने के समय से जोड़कर देख सकें। 

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अनुक्रम
   
स्वयं की ओर : एक यात्रा 30. तेरी याद — Pgs. 152
प्राक्कथन — Pgs. 9 31. प्रेम से भरा दिल — Pgs. 153
1. प्रस्तावना — Pgs. 15 32. मैं आई प्रभु — Pgs. 154
2. पूर्व आध्यात्मिक सूत्र — Pgs. 16 33. जाने कौन घड़ी — Pgs. 155
3. पूर्व आध्यात्मिक सूत्र का विलुप्तीकरण — Pgs. 18 34. मेरा ध्यान तो — Pgs. 156
4. पूर्व आध्यात्मिकता का पुनउर्द्भव एवं प्रगति — Pgs. 19 35. हरदम तेरी लगन — Pgs. 157
5. गुरु के प्रति समर्पण भाव — Pgs. 39 36. मैं हूँ कहाँ — Pgs. 158
6. गुरुदेव की वास्तविकता का ज्ञान होना — Pgs. 45 37. कहाँ-से-कहाँ — Pgs. 159
7. एकांत चिंतन — Pgs. 54 38. किस्मत बदल गई — Pgs. 162
8. सद्ज्ञानानुभूति — Pgs. 56 39. मेरे जीवन के जीवन — Pgs. 163
9. स्वयं की भूमिका — Pgs. 59 40. अधर हिंडोला : दिव्य निद्रा — Pgs. 164
10. सद्गुरु की भूमिका — Pgs. 60 41. दृष्टि पलट — Pgs. 166
11. सद्गुरु की आवश्यकता — Pgs. 61 42. एकमात्र इष्ट गुरुदेव — Pgs. 169
12. सद्ज्ञान आत्मसातीकरण — Pgs. 63 43. तू मेरी सरकार — Pgs. 170
13. भ्रमण एवं अनुभूति संग्रहण — Pgs. 66 44. गाऊँ गुण तेरे — Pgs. 171
14. उपसंहार — Pgs. 69 45. अनोखा दान — Pgs. 173
आध्यात्मिक यात्रा : एक साधक की डायरी से सोपान-3
प्राक्कथन — Pgs. 93 ज्ञानानुभूतियॉँ एवं सच्चिदानंद
सोपान-1 1. ईश्वर ही सार — Pgs. 177
प्रार्थना एवं मन संबोधन 2. परम संतुष्टि — Pgs. 179
1. एक गुजारिश (गुरुदेवजी के सामने सर्वप्रथम आने पर गाया भजन) — Pgs. 99 3. एका-द्वैत का खेल — Pgs. 180
2. मेरी तमन्ना (गुरु दीक्षा के दिन गाया भजन) — Pgs. 100 4. एक ही काम — Pgs. 181
3. सतशिष्य बनने की चाह — Pgs. 101 5. जाने न कोई तुझको — Pgs. 183
4. अरजी — Pgs. 102 6. एक राज की बात — Pgs. 184
5. कहाँ से तू आया है इतना  तो सोच — Pgs. 103 7. सतलोक दर्शन — Pgs. 186
6. किस विधि रिझाऊँ मैं — Pgs. 105 8. प्रभुवर की कृपा ने मेरा  जीवन बदल दिया — Pgs. 187
7. आरजू — Pgs. 106 9. तेरा नाम लेना तेरे लिए जीना — Pgs. 189
8. मेरा लक्ष्य — Pgs. 107 10. मेरा जीवन नया मेरी  दुनिया नई — Pgs. 190
9. कृपा करो — Pgs. 108 11. रे मन मेरे तू सुमिरि हरि — Pgs. 191
10. मेरी विनती — Pgs. 109 12. प्रेम तत्त्व की कहानी — Pgs. 193
11. तू मुझको बचा — Pgs. 110 13. प्रेम की अजब रीत — Pgs. 196
12. बंधन टूटे ना — Pgs. 111 14. ‘मैं’ मिल गई — Pgs. 197
13. मन काहे न सुधि करे — Pgs. 112 15. मेरा परिचय — Pgs. 198
14. दिल की तमन्ना — Pgs. 113 16. एक अहसास हूँ मैं — Pgs. 199
सोपान-2 17. धन्य वो घड़ी — Pgs. 200
दिव्यानुभूतियॉँ एवं समर्पण 18. सर्वव्याप्त राम — Pgs. 202
1. मेरी अभिलाषा  समर्पण के साथ — Pgs. 117 19. हम तो हैं शरण तिहारी — Pgs. 203
2. मेरी मंजिल — Pgs. 118 20. जो कुछ है सो तू ही है — Pgs. 204
3. हरि विछोह — Pgs. 119 21. प्रभु तुम ही तो दिल में बसे हो — Pgs. 206
4. एक तमन्ना — Pgs. 120 22. मैं तुमसे क्या माँगूँ — Pgs. 208
5. अनोखा अज्ञान — Pgs. 121 23. मुसाफिर की मंजिल — Pgs. 209
6. मेरी वसीयत — Pgs. 123 24. तुझसे मेरा रिश्ता सनातन — Pgs. 211
7. दिव्यानुभूति — Pgs. 124 25. सर्वस्व मुझको मिल गया — Pgs. 214
8. ऐसी किरपा कर दो प्रभु — Pgs. 126 26. कृपा की कृपा — Pgs. 216
9. मेरे अंतर में कोई तेरा नाम ले — Pgs. 127 27. किस्मत बदल गई — Pgs. 218
10. अंतरतम की चाह — Pgs. 128 28. बड़ा ही मजा है तेरे सजदे में — Pgs. 219
11. करूँ मैं वही — Pgs. 129 29. दिल की नजर — Pgs. 221
12. मेरा मैं खो गया — Pgs. 131 30. For Those - Who  wants to Enjoy — Pgs. 223
13. गुरुदेव मुझको सँभालो — Pgs. 132 31. सबकुछ है पर कुछ भी नहीं — Pgs. 225
14. प्रेम का रंग — Pgs. 133 32. सर्वस्व तुझमें मिल गया — Pgs. 227
15. मधु की तलब — Pgs. 134 33. वारी जाऊँ चरणों में — Pgs. 228
16. साँचा साथी — Pgs. 135 34. स्वकेंद्र की अनंत से  अनंत तक की यात्रा — Pgs. 230
17. ऊँची अटरिया — Pgs. 136 35. रब दी मरजी — Pgs. 235
18. सौंप दिया पतवार — Pgs. 137 36. नाम की करामात — Pgs. 236
19. नाथ मैं तेरी ही हूँ — Pgs. 138 37. तेरी कृपा ने ये क्या कर दिया — Pgs. 238
20. गुरुदेव से अरजी — Pgs. 139 38. अनजाने सफर की मंजिल :  आनंद शहर — Pgs. 240
21. इकरार यही करालूँ — Pgs. 141 39. संग-संग तेरे मैं कहाँ आ गई — Pgs. 243
22. तुझ संग जीना — Pgs. 143 40. आत्मा की पूर्व गति व  पश्चिम गति — Pgs. 244
23. दिल का तराना — Pgs. 144 41. जाने कोई कैसे तुझको — Pgs. 246
24. अनुरूप तुम बना लो — Pgs. 145 42. प्रभु तेरी लीला अपरंपार — Pgs. 247
25. तुमसे लगन लगी — Pgs. 146 43. Who am I? — Pgs. 249
26. मेरा सजन — Pgs. 148 44. खुद-से-खुद का मिलन — Pgs. 251
27. तेरे बिन कुछ भी नहीं — Pgs. 149 45. तेरा अस्तित्व — Pgs. 253
28. तू ही बना है मेरा जमाना — Pgs. 150 46. मन से ऊपर रहनि — Pgs. 255
29. मोहब्बत का ऐलान — Pgs. 151  

 

The Author

Dr. Kusum Gaur

पुस्तक ‘स्वयं की ओर : एक यात्रा’ एवं ‘आध्यात्मिक यात्रा : एक साधक की डायरी से’ दोनों एक ही साधक अर्थात् डॉ. कुसुम गौड़, जो कि अपनी स्वयं की अनुभूति करने के लिए इस यात्रा पर निकलती हैं, की अनुभूतियों का संग्रह है, जो क्रमशः अलग-अलग तरह से वर्णित है।
जहाँ ‘आध्यात्मिक यात्रा : एक साधक की डायरी से’ उन पद्यों का संकलन है, जो साधक को इस यात्रा के दौरान स्वयं अनुभूत होकर स्वयं की भावलहरियों से समय-समय पर प्रस्फुटित हुए तथा ‘स्वयं की ओर : एक यात्रा’ इस साधक की स्वयं की ओर क्रमिक गति व अलग-अलग स्तर पर हुई अनुभूतियों व उनकी समझ का वर्णन है।
इस आध्यात्मिक यात्रा के दौरान इस साधक को क्या-क्या परेशानियाँ आईं, कैसी-कैसी रुकावटें आईं, कैसे उनका निराकरण हुआ तथा कैसे उनसे निपटना हुआ, उनका वर्णन है।
वैसे तो ये दो अलग-अलग पुस्तक भी हो सकती हैं, परंतु इन दोनों को एक साथ रखने का उद्देश्य भी यही है कि पाठकगण ‘स्वयं की ओर : एक यात्रा’ में वर्णित अनुभूतियों व उनकी समझ को ‘आध्यात्मिक यात्रा : एक साधक की डायरी से’ में लिखे गए पद्य तथा उसके लिखने के समय से जोड़कर देख सकें।  

 

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