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Mazhab-E-Mohabbat   

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Author Morari Bapu
Features
  • ISBN : 9789352666171
  • Language : Hindi
  • Publisher : Prabhat Prakashan
  • Edition : First
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  • Morari Bapu
  • 9789352666171
  • Hindi
  • Prabhat Prakashan
  • First
  • 2018
  • 176
  • Hard Cover

Description

मजहब  ए  मोहब्बत
प्रस्तुत पुस्तक में महुवा और अहमदाबाद में मुस्लिम समुदाय के बीच दिए गए प्रवचन हैं। पिछले 21 साल से महुवा में बापू और इसलाम के बिलग-बिलग मौलाना की सन्निधि में तकरीर होती है। उनमें से कुछ प्रवचनों को यहाँ संकलित किया है। 2009 में कैलास गुरुकुल में आदरणीय श्री दलाईलामाजी की विशेष उपस्थिति में सभी धर्मों के प्रतिनिधि आए थे और धर्म-संवाद का आयोजन हुआ था। उस समय बापू जो बोले थे, उस प्रवचन का भी समावेश किया गया है। मूल ढंग में ही इन शब्दों को रऌखा गया है।
बादल जब बरसता है तो पूरे इलाके पर बरसता है। नदी का उद्गम स्थान भले कोई एक जगह से हो, जल सबको आप्लावित करता है। सूर्योदय होता है किसी एक जगह से, लेकिन उसकी किरणें हर जगह फैल जाती हैं, ठीक वैसे ही, बापू भले महुवा में बोले हों, किसी एक धर्म के लोगों के बीच में बोले हों, लेकिन उनके विचार वैश्विक हैं। वैसे देखने जाएँ तो देह से तो बापू सनातनी हिंदू परंपरा के साधू हैं, लेकिन क्या पूरे विश्व को आज सत्य, प्रेम और करुणा नहीं चाहिए? अध्यात्म में कहाँ जात-पात होती है? हमारे मन में छिपे इन दोषों से हमें कौन मुक्त करेगा? इसीलिए महुवा हो या और कोई भी स्थान हो, बापू, मुसलिम, ख्रिस्ती, जैन, बौद्ध, सिख या यहूदी, कोई भी हो, उसे एक ही बात समझाने की प्रामाणिक प्रार्थना करते हैं कि हम सबके लिए अब तो हमारा मजहब, केवल, मजहब-ए-मोहब्बत ही है

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अनुक्रम

प्रस्तुत पुस्तक के बारे में कुछ बातें ... 5

1. जश्ने हसने मुजतबा—11

2. जश्ने यादें हुसैन—24

3. जश्ने मौला अली—35

4. जश्ने यादें पंजेतनी—46

5. जुहापूरा-अहमदाबाद—57

6. जश्ने यादे बावफा—71

7. तकरीर-महुवा—85

8. जश्ने इंतजार—95

9. धर्मसंवाद—107

10. जश्ने मिलादुन्नबी—123

11. जश्ने मोलू दे काबा—132

12. जश्ने गदीर —142

13. जश्ने मनकुंतो मौला—149

14. जश्ने सैयदुश साजेदीन—163

The Author

Morari Bapu

मोरारि बापू के नाम से आज शायद ही कोई अपरिचित होगा। गुजरात के भावनगर जिले के तलगाजरडा गाँव में सन् 1946 की महाशिवरात्रि के दिन आपका जन्म हुआ था। पिता श्री प्रभुदासबापू और माता सावित्रीमा की कोख से साधु जाति में पैदा हुई यह संतान आज पूरे विश्व में गणमान्य रामकथाकार के नाम से प्रसिद्ध हैं। आपने अपने दादाजी पूज्य त्रिभुवनदादाजी, जो आपके सद्गुरुदेव भी हैं, के चरणों में बैठकर रामचरितमानस की आध्यात्मिक शिक्षा पाई है। महुवा जाते समय आपको रामचरितमानस की चौपाइयाँ कंठस्थ करने को दी जाती थीं और फिर शाम को उन्हीं चौपाइयों के अर्थों का अभ्यास और अध्ययन दादाजी के पास होता था। कुछ वर्षों तक महुवा के प्राइमरी स्कूल में शिक्षण कार्य भी किया। इसी दौरान आप जैसे दो परिस्थितियों के बीच जी रहे थे। एक ओर बाहरी जीवन था तो दूसरी ओर आपकी अंतरयात्रा और साधना भी साथ-साथ चल रही थी। बचपन भले ही छोटे गाँव में बिता, लेकिन आज आप पूरे विश्व में रामकथा को लेकर सत्य, प्रेम और करुणा का संदेश फैला रहे हैं। सामाजिक समरसता आपके चिंतन का आधार है। विश्वभर में आपके द्वारा 800 से भी ज्यादा रामकथा हुई हैं। बापू ने सामाजिक-सांस्कृतिक क्षेत्रों में अग्रणी भूमिका निभाई है और जब भी समाज में कोई त्रासदी या विपदा आईं, उन्होंने दिल खोलकर मदद की है। आप विगत 16 वर्षों से ‘अस्मिता पर्व’ का आयोजन कर रहे हैं, जिसमें शिक्षा-संस्कृति-कला-संगीत के क्षेत्रों की मूर्धन्य विभूतियों का सम्मान करते है।

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