Chauri Chaura Vidroh Ki Mahagatha

Chauri Chaura Vidroh Ki Mahagatha

Author: Subhash Chandra Kushwaha
ISBN: 9789351861294
Language: Hindi
Publisher: Prabhat Prakashan
Edition: 1st
Publication Year: 2015
Pages: 348
Binding Style: Hard Cover
Rs. 500
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Description

4 फरवरी, 1922। दोपहर बाद 4 बजे किसानों के नेतृत्व में दो हजार से ज्यादा गाँववालों ने चौरी चौरा थाने को घेर लिया। ब्रिटिश सत्ता के लंबे उत्पीड़न और अपमान की प्रतिक्रिया में उन्होंने थाना भवन में आग लगा दी, जिसमें छुपे हुए 24 सिपाही जलकर मर गए।
हिंसा और अहिंसा की बहस के परे जाकर यह किताब उन सामाजिक-राजनीतिक जड़ों की पड़ताल करती है, जिसने ब्रिटिश उपनिवेश की पिछड़ी, दलित, गरीब जनता को ऐसा कदम उठाने के लिए बाध्य किया। यह किताब 1922 के उस अनजान से गाँव चौरी चौरा में ले जाएगी, जिसे आने वाले बरसों में आजादी के आंदोलन को एक शक्ल देनी थी। चौरी चौरा अकादमिक प्रामाणिकता के साथ अपने समय के एक बेहतरीन कथाकार की बेजोड़ किस्सागोई की जमीन पर विकसित हुई है।

The Author
Subhash Chandra KushwahaSubhash Chandra Kushwaha

सुभाष चंद्र कुशवाहा उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में 1961 में जनमे और उन्होंने (विज्ञान) सांख्यिकी में स्नातकोत्तर किया। वे हिंदी के जाने-माने लेखक हैं। उनके तीन कविता-संग्रह ‘आशा’, ‘कैद में है जिंदगी’ और ‘गाँव हुए बेगाने अब’ और तीन कहानी-संग्रह ‘हाकिम सराय का आखिरी आदमी’, ‘बूचड़खाना’ और ‘होशियारी खटक रही है’ प्रकाशित हुए हैं। इसके अलावा उन्होंने ‘कथा में गाँव’ (कहानी-संग्रह),  ‘जातिदंश  की कहानियाँ’, ‘लोकरंग’ (1 और 2) आदि पुस्तकें संपादित की हैं। उन्होंने ‘कथादेश’ पत्रिका के किसान विशेषांक ‘किसान जीवन का यथार्थ  : एक फोकस’ का संपादन किया है और 1998 से ‘लोकरंग’ पत्रिका का संपादन कर रहे हैं।
वे लखनऊ में रहते हैं।

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