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Solaha Kahaniyan

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Author Harish Pathak
Features
  • ISBN : 9789381063286
  • Language : Hindi
  • Publisher : Prabhat Prakashan
  • Edition : 1st
  • ...more
  • Kindle Store

More Information

  • Harish Pathak
  • 9789381063286
  • Hindi
  • Prabhat Prakashan
  • 1st
  • 2012
  • 160
  • Hard Cover
  • 330 Grams

Description

विचारधारा और प्रतिबद्धता सरीखी फैशनेबल बाधा-दौड़ों पर खरा उतरने की आकांक्षा ने हिंदी कहानी को लंबे समय से असरग्रस्त रखा है। समकालीन हिंदी कहानी में इस मद में कुछ और जुमले भी तैनात हो गए हैं, जो कहानी में विन्यस्त विमर्श को कहानीपन से ज्यादा अहम और दीगर घोषित करने पर तुले रहते हैं।
अरसे से कथा साहित्य में उपस्थित हरीश पाठक की कहानियों का मुख्य आकर्षण अपने समय-संदर्भों की पड़ताल है। संघर्ष, त्रास, प्रेम, आकांक्षा, उत्पीडऩ, अपराध और प्रतिशोध उनकी कहानियों में कभी समष्‍टिगत फलक पर अपना तांडव करते हैं तो कभी व्यक्‍ति-परिवार के स्तर पर। एक कहानी में तो दोनों का बेहद मार्मिक विलय ही हो जाता है। मगर कहना होगा कि अपनी कहानी कला को पैनाने के लिए हरीश व्यक्‍ति परिवार या कहें आम जन-जिंदगी पर ज्यादा केंद्रित रहते हैं।
अपने समय-समाज के अलग-अलग और कदाचित् अनछुए पहलुओं को एक विनम्र पठनीयता से समृद्ध करती ये कहानियाँ इस अर्थ में एक-दूसरे की पूरक सी भी लगती हैं।
हरीश पाठक की इन कहानियों में ग्रामीण जीवन की वंचना, विस्थापन, गरीबी तथा विकास के कारण आए संत्रास की कचोट और महानगरीय जीवन की दैनंदिनी में भस्म होते चरित्रों की ऊहापोह और मजबूरियाँ बड़ी निर्विकार प्रामाणिकता से दर्ज हुई हैं। पाठक के भीतर जरूरी टीस जगाने के बाद इनका वजूद खत्म नहीं होता है, वे जैसे पुनर्पाठ के लिए उकसाती हैं।
—ओमा शर्मा

The Author

Harish Pathak

जन्म : 20 दिसंबर, 1957 को ग्वालियर (म.प्र.) में।
कृतित्व : ‘सरेआम’, ‘गुम होता आदमी’ (कहानी संग्रह), ‘त्रिकोण के तीनों कोण’ (पत्रकारिता) पुस्तकें प्रकाशित। ग्वालियर के दैनिक ‘स्वदेश’ से पत्रकारिता की शुरुआत। ‘मुक्‍ता’, ‘धर्मयुग’ से संबद्ध रहे। ‘कुबेर टाइंस’ (मुंबई संस्करण) के कार्यकारी संपादक, दैनिक ‘हिंदुस्तान’ (भागलपुर संस्करण) के समन्वय संपादक, ‘एकता चक्र’ व ‘पूर्णविराम’ (नवभारत समूह) के संपादक रहे।
‘हिंदी कहानी कोश’, ‘आठवें दशक के कहानीकार’, ‘अस्पताल की कहानियाँ’, ‘त्रासद प्रेम कथाएँ’ संग्रहों में कहानियाँ शामिल। पुणे विश्‍वविद्यालय से ‘हरीश पाठक कृत गुम होता आदमी : एक अनुशीलन’ पर एम.फिल.।
सम्मान-पुरस्कार : ‘धर्मयुग’ में प्रकाशित स्तंभ ‘सुर्खियों के पीछे’ के लिए उ.प्र. सरकार का गणेशशंकर विद्यार्थी पुरस्कार। एक सौ दस कड़‌ियों में प्रसारित धारावाहिक ‘जन-गण-मन’ और साठ कड़‌ियों में प्रसारित ‘पोल टाइंस’ का लेखन।
संप्रति : ‘राष्‍ट्रीय सहारा’ (पटना संस्करण) के स्थानीय संपादक।

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