Sankalp-Kaal

Sankalp-Kaal   

Author: Atal Bihari Vajpayee , N.M. Ghatate
ISBN: 8173153000
Language: Hindi
Publisher: Prabhat Prakashan
Edition: 1st
Publication Year: 2004
Pages: 392
Binding Style: Hard Cover
Rs. 500
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Description

श्री अटल बिहारी वाजपेयी के चिंतन और चिंता का विषय हमेशा ही संपूर्ण राष्‍ट्र रहा है । भारत और भारतीयता की संप्रभुता और संवर्द्धन की कामना उनके निजी एजेंडे में सर्वोपरि रही है । यह भावना और कामना कभी संसद में विपक्ष के सांसद के रूप ने प्रकट होती रही, कभी कवि और पत्रकार के रूप में, कभी सांस्कृतिक मंचों से एक सुलझे हुए प्रखर वक्‍ता के रूप में और 1996 से भारत के प्रधानमंत्री के रूप में अभिव्यक्‍त हो रही है ।
श्री वाजपेयी ने देश की सत्ता की बागडोर का दायित्व एक ट्रस्टी के रूप में ग्रहण किया । राष्‍ट्र के सम्मान और श्रीवृद्धि कौ सर्वोच्च प्राथमिकता दी । न किसी दबाव को आड़े आने दिया, न किसी प्रलोभन को । न किसी संकट से विचलित हुए, न किसी स्वार्थ से । फिर चाहे वह परमाणु परीक्षण हो, कारगिल समस्या हो, लाहौर-ढाका यात्रा हो या कोई और अंतररष्‍ट्रीय मुद‍्दा ।
इसी तरह राष्‍ट्रीय मुद‍्दों पर भी दो टूक और राष्‍ट्र हित को सर्वोपरि मानते हुए निर्णय लिये-चाहे वह कावेरी विवाद हो या कोंकण रेलवे लाइन का मसला, संरचनात्मक ढाँचे का विकास हो या सॉफ्टवेयर के लिए सूचना और प्रौद्योगिकी कार्यदल की स्थापना, केंद्रीय बिजली नियंत्रण आयोग का गठन हो या राष्‍ट्रीय राजमार्गों और हवाई अड्डों का विकास, नई टेलीकॉम नीति हो या आवास निर्माण को प्रोत्साहन देने का सवाल, ग्रामीणों के लिए रोजगार के अवसर जुटाने का मामला हो या विदेशों में बसे भारतीय मूल के लोगों के लिए बीमा योजना ।
संप्रति अपने प्रधानमंत्रित्व काल में श्री वाजपेयी ने जो उपलब्धियाँ हासिल की हैं उन्हें दो शब्दों में कहा जा सकता है-जो कहा वह कर दिखाया । प्रधानमंत्री पद पर आसीन होने के बाद भी उनकी कथनी और करनी एक ही बनी रही-इसका प्रमाण हैं इस ' संकल्प-काल ' में संकलित वे महत्वपूर्ण भाषण जो श्री वाजपेयी ने प्रधानमंत्री के रूप में विभिन्न मंचों से दिए। अपनी बात को स्पष्‍ट और दृढ़ शब्दों में कहना अटलजी जैसे न‌िर्भय और सर्वमान्य व्यक्‍त‌ि के लिए सहज और संभव रहा है । लाल किला से लाहौर तक, संसद से संयुक्‍त राष्‍ट्र महासभा तक विस्तृत विभिन्न राष्‍ट्रीय- अंतरराष्‍ट्रीय मंचों से दिए गए इन भाषणों से बार-बार एक ही सत्य एवं तथ्य प्रमाणित और ध्वनित होता है- श्री वाजपेयी के स्वर और शब्दों में भारत राष्‍ट्र राज्य के एक अरब लोगों का मौन समर्थन और भावना समाहित है ।
प्रभात प्रकाशन से प्रकाशित ' मेरी संसदीय यात्रा ' (चार भाग) के बाद ' संकल्प-काल ' का प्रकाशन अटलजी के पाठकों और उनके विचारों के संग्राहकों के लिए एक और उपलब्‍ध‌ि है।

The Author
Atal Bihari VajpayeeAtal Bihari Vajpayee

भारतीय राजनीति के खिर पुरुष और पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी ओजस्वी कवि और प्रखर वक्‍ता हैं। उनका जन्म 25 दिसंबर, 1924 को ग्वालियर, म.प्र. में हुआ। उन्होंने राजनीति-शास्‍त्र से एम.ए. तक की शिक्षा प्राप्‍त की तथा एक पत्रकारर के रूप में अपना जीवन शुरू किया। पिछले 55 वर्षों के लंबे कालखंड में उन्होंने भारतीय राजनीति में जो गरिमापूर्ण योगदान दिया वह एक आदर्श रहा है। राष्‍ट्र के प्रति उनकी समर्पित सेवाओं के लिए सन‍् 1992 में राष्‍ट्रपति ने उन्हें ‘पद‍्म विभूषण’ से विभू‌‌ष‌ित किया। 1993 में कानपुर विश्‍वविद्यालय ने उन्हें फिलॉसफी में डॉक्टरेट की मानद उपाधि प्रदान की। 1994 में ‘लोकमान्य तिलक पुरस्कार’ दिया गया। 1994 में ‘लोकमान्य तिलक पुरस्कार’ दिया गया। 1994 में में ‘सर्वश्रेष्‍ठ सांसद’ चुना गया और ‘गोविंद बल्लभ पंत पुरस्कार’ से पुरस्कृत किया गया।
भारतीय राजनीति के शिखर पुरुष और पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी ओजस्वी कवि और प्रखर वक्‍‍ता हैं। उनका जन्म 25 दिसंबर, 1924 को ग्वालियर, म.प्र. में हुआ। उन्होंने राजनीति-शास्‍त्र से एम.ए. तक की शिक्षा प्राप्‍त की तथा एक पत्रकार के रपू में अपना जीवन शुरू किया। पिछले 55 वपर्षों के लंबे कालखंड में उन्‍होंने भारतीय राजनीति में जो गरिमापूर्ण योगदान दिया वह एक आदर्श रहा है। राष्‍ट्र के प्रति उनकी समर्पित सेवाओं के लिए सन‍् 1992 में राष्‍ट्रप‌ित ने उन्हें ‘पद‍्म विभूषण’ से विभूषित किया। 1993 में कानपुर विश्‍वविद्यालय ने उन्हें फिलॉसफी में डॉक्टरेट की मानद उपाधि प्रदान की। 1994 में ‘लोकमान्य ‌तिलक पुरस्कार’ दिया गया। 1994 में ‘सर्वश्रेष्‍ठ सांसद’ चुना गया और ‘गो‌व‌िंद बल्लभ पंत पुरस्कार’ से पुरस्कृत किया गया।
अटलजी को ‘कैदी कविराय की कुंडलियाँ’, ‘न्यू डाइमेंशंस ऑफ एशियन फॉरेन पॉलिसी’, ‘मृत्यु या ’हत्या‘, ‘जनसंघ और मुसलमान’, ‘मेरी इक्‍यावन कविताएँ’, ‘मेरी संसदीय यात्रा’ (चार खंड), ‘संकल्प-काल’ एवं ‘गठबंधन की राजनीति’ जैसी पुस्तकें ‌ल‌िखने का श्रेय प्राप्‍त है।

N.M. GhatateN.M. Ghatate

इन ग्रंथों के संपादक डॉ. नारायण माधव घटाटे इन दिनों विधि आयोग के सदस्य के रूप में भारतीय संविधान की सेवा कर रहे हैं; इससे पूर्व डॉ. घटाटे पिछले 30 वर्षों से उच्चतम न्यायालय में वकालत करते रहे हैं ।
डॉ. घटाटे ने स्नातक की उपाधि नागपुर विश्‍‍वविद्यालय से, एल-एल.बी. दिल्ली विश्‍‍वविद्यालय से, स्नातकोत्तर और पी-एच.डी. की उपाधि विदेशी क्षेत्र अध्ययन विभाग, अमेरिकन विश्‍‍वविद्यालय, वाशिंगटन से प्राप्‍त कीं । अमेरिका में अध्ययन के दौरान विश्‍वविद्यालय के विदेशी क्षेत्र अध्ययन विभाग में सलाहकार और अंतरराष्‍ट्रीय राजनीति के विविध विषयों के अध्यापक भी रहे ।
श्री घटाटे ने स्नातकोत्तर शोधप्रबंध ' चीन-बर्मा सीमा विवाद ' पर और पी-एच.डी. शोधप्रबंध ' भारतीय विदेश नीति में निरस्त्रीकरण ' विषय पर लिखा । वे संविधान, अंतरराष्‍ट्रीय संबंध और सम-सामयिक विषयों पर कई शोध-लेख लिख चुके हैं ।
उच्चतम न्यायालय में वरिष्‍ठ अधिवक्‍ता रहे डॉ. घटाटे ने 1975 के आपातकाल के दौरान नजरबंद सभी प्रमुख विपक्षी दलों के नेताओं की ओर से पैरवी की । डॉ. घटाटे 1973 से 1977 तक भारतीय जनसंघ और 1988 से भारतीय जनता पार्टी की राष्‍ट्रीय कार्यकारिणी में रहे हैं ।
डॉ. घटाटे ने ' मेरी संसदीय यात्रा ' से पूर्व अटलजी के संसदीय भाषणों पर केंद्रित ' संसद में तीन दशक ' और ' फोर डिकेड्स इन पार्लियामेंट ' पुस्तकों का भी संपादन किया । इनके अतिरिक्‍त ' भारत-सोवियत संधि : प्रतिक्रियाएँ और विचार',' बँगलादेश : संघर्ष और परिणाम ' और ' आपातकाल हटाओ ' शीर्षक पुस्तकों का सफल लेखन-संपादन किया है ।

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